Bhopal । रेल मार्ग के जरिए मध्यप्रदेश में बढ़ती मादक पदार्थ तस्करी के बीच Bhopal Crime Branch ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पंजाब मेल ट्रेन से भोपाल पहुंचे सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों में पांच महिलाएं और दो पुरुष शामिल हैं। पुलिस ने इनके कब्जे से लगभग 36 किलो गांजा बरामद किया है, जिसकी कीमत करीब चार लाख रुपये बताई जा रही है।
यह मामला केवल एक सामान्य ड्रग्स बरामदगी नहीं, बल्कि बदलते तस्करी नेटवर्क और पुलिस की तकनीकी निगरानी के बीच चल रही नई चुनौती को भी सामने लाता है। खास बात यह रही कि आरोपी घरेलू सामान की आड़ में गांजा छिपाकर ला रहे थे, ताकि रेलवे यात्रा के दौरान उन पर संदेह न हो।
घरेलू सामान के बीच छिपाकर लाई जा रही थी गांजे की खेप
पुलिस जांच के अनुसार आरोपी प्लास्टिक की टोकरी, तगाड़ी, बाल्टियां, झोले और अन्य घरेलू सामान लेकर यात्रा कर रहे थे। इन्हीं सामानों के भीतर ब्राउन टेप से पैक गांजे के पैकेट छिपाए गए थे।
क्राइम ब्रांच को मुखबिर से सूचना मिली थी कि कुछ तस्कर ट्रेन से बड़ी मात्रा में गांजा लेकर भोपाल पहुंचेंगे और आउटर क्षेत्र से उतरकर करारिया जंगल के रास्ते Chhola क्षेत्र तक सप्लाई करेंगे। इसके बाद पुलिस ने बजरिया इलाके में घेराबंदी कर सभी संदिग्धों को पकड़ लिया।
महिलाओं की बढ़ती भूमिका ने बढ़ाई चिंता
गिरफ्तार आरोपियों में पांच महिलाओं का शामिल होना जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। मादक पदार्थ तस्करी के मामलों में पिछले कुछ वर्षों में महिला नेटवर्क का उपयोग बढ़ा है, क्योंकि तस्करों को लगता है कि महिलाओं पर कम संदेह किया जाएगा।
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि संगठित ड्रग्स नेटवर्क अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर परिवार आधारित और समूह आधारित परिवहन मॉडल अपना रहे हैं। इसमें मजदूर, गरीब परिवार और सीमित आय वाले लोगों को आसान कमाई का लालच देकर शामिल किया जाता है।
भोपाल क्यों बन रहा है ट्रांजिट और सप्लाई पॉइंट?
मध्यप्रदेश लंबे समय से उत्तर और दक्षिण भारत के बीच ट्रांजिट कॉरिडोर माना जाता रहा है। रेलवे नेटवर्क और हाईवे कनेक्टिविटी के कारण भोपाल, इटारसी और आसपास के इलाके कई बार मादक पदार्थों की आवाजाही के लिए उपयोग किए जाते हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक पूछताछ में संकेत मिले हैं कि आरोपी बाहरी राज्यों से गांजा लाकर भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में सप्लाई करते थे। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि नेटवर्क का मुख्य सप्लायर कौन है और स्थानीय स्तर पर किन लोगों तक यह खेप पहुंचाई जानी थी।
युवाओं में नशे की बढ़ती चुनौती
विशेषज्ञ मानते हैं कि गांजा और सिंथेटिक ड्रग्स का फैलाव अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहा। छोटे शहरों और कॉलेज इलाकों में भी नशे का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है।
यही कारण है कि Sanjay Kumar और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त Monika Shukla के निर्देश पर शहर में मादक पदार्थों के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं।
पुलिस का कहना है कि कार्रवाई केवल वाहकों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सप्लाई चेन और फाइनेंस नेटवर्क की भी जांच की जाएगी।
गरीबी, अशिक्षा और अपराध का कनेक्शन
गिरफ्तार आरोपियों की पृष्ठभूमि बताती है कि अधिकांश आरोपी मजदूरी से जुड़े हैं और कई अशिक्षित हैं। अपराध विशेषज्ञों के अनुसार संगठित तस्करी नेटवर्क अक्सर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निशाना बनाते हैं, क्योंकि वे कम पैसों में जोखिम उठाने को तैयार हो जाते हैं।
हालांकि पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपी केवल कैरियर थे या नेटवर्क का सक्रिय हिस्सा।
NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज
Bhopal Crime Branch ने आरोपियों के खिलाफ Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act की धाराओं 8/20 और 29 के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ने गांजे के अलावा मोबाइल फोन और परिवहन में उपयोग किए गए सामान भी जब्त किए हैं।
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