कटनी/भोपाल। कटनी के पूर्व पुलिस अधीक्षक और वर्तमान में PTRI जहांगीराबाद, भोपाल में पदस्थ 2014 बैच के IPS अधिकारी अभिजीत कुमार रंजन एक बार फिर विवादों में हैं। उनके खिलाफ विभागीय जांच की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि मुख्यमंत्री की प्रशासकीय स्वीकृति के बावजूद गृह विभाग के स्तर पर जांच से संबंधित फाइल लंबित है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर के अधिवक्ता देवेंद्र शर्मा ने इस मामले में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, केंद्रीय गृह सचिव, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को शिकायत भेजकर कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
कटनी कार्यकाल को लेकर भी शिकायत
शिकायतकर्ता के अनुसार, अभिजीत रंजन के कटनी SP के कार्यकाल के दौरान कई प्रशासनिक और नीतिगत फैसले चर्चा में रहे थे। शिकायत में पद के कथित दुरुपयोग और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप भी लगाए गए हैं। दावा किया गया है कि लोकायुक्त के स्तर पर भी शिकायत की जांच शुरू हुई है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
विभागीय जांच की सिफारिश का दावा
शिकायत में कहा गया है कि पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने विभागीय जांच की अनुशंसा की थी और मुख्यमंत्री कार्यालय से भी इस संबंध में अनुमोदन मिला था। इसके बावजूद गृह विभाग में फाइल आगे नहीं बढ़ने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने इसे प्रशासनिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल बताया है।
ACR को लेकर भी उठाए सवाल
शिकायत में अधिकारी की गोपनीय चरित्रावली (ACR) में कथित तौर पर कम रेटिंग दिए जाने का उल्लेख किया गया है। इसमें पूर्व DGP विवेक जौहरी की कथित टिप्पणी का भी हवाला दिया गया है कि अधिकारी फील्ड पोस्टिंग के लिए उपयुक्त नहीं हैं। इन दावों की पुष्टि के लिए आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होना जरूरी है।
दूसरे मामले से तुलना
शिकायतकर्ता ने हरदा से जुड़े एक अन्य मामले में प्रमोटी IPS अधिकारी संजीव कंचन के खिलाफ जांच प्रक्रिया शुरू होने का हवाला देते हुए सवाल उठाया है कि अभिजीत रंजन से जुड़े मामले में कार्रवाई क्यों लंबित है। शिकायत में मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय करने की मांग की गई है।
अधिवक्ता देवेंद्र शर्मा ने मुख्यमंत्री के अनुमोदन के बावजूद फाइल लंबित रहने की जांच कराने और यदि प्रक्रिया में अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल यह मामला शिकायत और लगाए गए आरोपों के स्तर पर है; अंतिम निष्कर्ष संबंधित विभाग की जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही तय होगा।
