भोपाल, 23 अगस्त 2026। आंचलिक विज्ञान केंद्र, भोपाल में तृतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस-2026 के तहत 19 से 23 अगस्त तक आयोजित विज्ञान और अंतरिक्ष आधारित कार्यक्रमों का रविवार को उत्साहपूर्ण वातावरण में समापन हुआ। कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों, युवाओं, परिवारों और आमजन को भारत की अंतरिक्ष यात्रा, वैज्ञानिक उपलब्धियों और अंतरिक्ष विज्ञान के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराना था।
समापन दिवस पर ‘बनाएं और साथ ले जाएं’ (Make-and-Take) गतिविधि आयोजित की गई। इसमें विद्यार्थियों और परिवारों ने विज्ञान आधारित मॉडल और गतिविधियां स्वयं तैयार कीं। इसके जरिए वैज्ञानिक अवधारणाओं को प्रयोगात्मक तरीके से समझने का अवसर मिला।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण ‘अंतरिक्ष में वस्तुएं कैसे व्यवहार करती हैं?’ विषय पर विज्ञान प्रदर्शन रहा। इसमें कम तापमान और कम दाब जैसी परिस्थितियों में विभिन्न पदार्थों के व्यवहार को लाइव प्रयोगों के माध्यम से समझाया गया।
भारत की अंतरिक्ष विरासत की दिखाई गौरवपूर्ण यात्रा
समारोह के दौरान ‘प्राचीन आकाश से आधुनिक क्षितिज तक-भारत की अंतरिक्ष विरासत’ विशेष प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही। प्रदर्शनी में भारत की प्राचीन खगोलीय परंपराओं से लेकर आधुनिक अंतरिक्ष अभियानों तक की यात्रा को प्रदर्शित किया गया। इसके साथ ही केंद्र में नव उद्घाटित अंतरिक्ष अन्वेषण दीर्घा का विशेष मार्गदर्शित भ्रमण कराया गया।
रॉकेट विज्ञान प्रदर्शन के जरिए आगंतुकों को रॉकेट के काम करने के मूल सिद्धांत, प्रणोदन और अंतरिक्ष तक पहुंचने के पीछे के विज्ञान की जानकारी सरल और रोचक तरीके से दी गई।
19 से 23 अगस्त तक आयोजित विभिन्न हैंड्स-ऑन गतिविधियों, लाइव विज्ञान प्रदर्शनों, विशेष प्रदर्शनी, निर्देशित भ्रमण और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी गतिविधियों में विद्यार्थियों, परिवारों और आमजन ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
आंचलिक विज्ञान केंद्र भोपाल का कहना है कि राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस समारोह का उद्देश्य केवल भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों का उत्सव मनाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों और युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जिज्ञासा, नवाचार और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देना भी है। केंद्र भविष्य में भी विज्ञान और अंतरिक्ष आधारित गतिविधियों के माध्यम से आमजन में वैज्ञानिक जागरूकता बढ़ाने के प्रयास जारी रखेगा।
