ईपीएफ के नए नियमों पर कर्मचारी संगठनों ने उठाए सवाल, केंद्र सरकार से पुनर्विचार की मांग

भोपाल। कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) से जुड़े प्रस्तावित नए नियमों को लेकर कर्मचारी संगठनों ने केंद्र सरकार से पुनर्विचार की मांग की है। सेवानिवृत्त कर्मचारी भविष्य निधि कल्याण समिति और मध्यप्रदेश संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ ने दावा किया है कि नई व्यवस्था लागू होने से कर्मचारियों के भविष्य निधि (PF) में जमा होने वाली राशि कम हो सकती है, जबकि नियोक्ताओं को इसका लाभ मिलेगा।

समिति के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंद्रशेखर परसाई और महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि 29 जून 2026 को जारी नई कर्मचारी भविष्य निधि योजना-2026 पर सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए।

संगठनों का दावा- कर्मचारियों को होगा नुकसान

दोनों संगठनों का कहना है कि नई व्यवस्था को इस रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है कि कर्मचारियों का अंशदान कम होने से उनके हाथ में अधिक वेतन आएगा, लेकिन इससे सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाली भविष्य निधि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

उनका आरोप है कि यदि नियोक्ता का अंशदान वेतन की वास्तविक राशि के बजाय निर्धारित वेतन सीमा के आधार पर सीमित कर दिया जाता है, तो कर्मचारियों के पीएफ खाते में जमा होने वाली कुल राशि में कमी आएगी। इससे लंबे समय में सेवानिवृत्ति लाभ प्रभावित हो सकते हैं।

वेतन सीमा हटाने की मांग

कर्मचारी संगठनों ने कहा कि वे लंबे समय से ईपीएफ में वेतन सीमा (Salary Ceiling) समाप्त करने की मांग करते रहे हैं। उनका कहना है कि कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का अंशदान वास्तविक वेतन के आधार पर होना चाहिए, ताकि कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के समय पर्याप्त भविष्य निधि मिल सके।

सरकार से पुनर्विचार की अपील

चंद्रशेखर परसाई और रमेश राठौर ने केंद्र सरकार से कर्मचारी भविष्य निधि योजना-2026 की समीक्षा करने तथा कर्मचारी हितों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक संशोधन करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि प्रस्तावित व्यवस्था लागू होती है, तो इसका प्रभाव बड़ी संख्या में कर्मचारियों और उनके परिवारों पर पड़ सकता है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि देश के विभिन्न कर्मचारी संगठन इस मुद्दे पर एकजुट होकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं।

महत्वपूर्ण: इस प्रेस विज्ञप्ति में व्यक्त दावे संबंधित कर्मचारी संगठनों के हैं। समाचार लिखे जाने तक केंद्र सरकार या कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की ओर से इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हुई है। ऐसी प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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