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पुलिस बल नहीं मिलने से रुकी कजलीखेड़ा में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, विस्थापन को लेकर रहवासियों का विरोध

सड़क चौड़ीकरण परियोजना के बीच फंसी कार्रवाई, सुरक्षित पुनर्वास की मांग तेज

भोपाल, 5 जून 2026। राजधानी भोपाल में सड़क निर्माण और चौड़ीकरण परियोजनाओं को गति देने के लिए जिला प्रशासन लगातार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर रहा है। इसी क्रम में कजलीखेड़ा क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण में बाधा बन रही झुग्गियों और मकानों को हटाने की कार्रवाई प्रस्तावित थी, लेकिन पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध नहीं होने के कारण यह अभियान फिलहाल टल गया है। स्थानीय रहवासियों के विरोध के चलते गुरुवार को शुरू हुई कार्रवाई भी पूरी नहीं हो सकी थी।

शुक्रवार को प्रशासन द्वारा दोबारा कार्रवाई की तैयारी की गई थी, लेकिन पुलिस बल की अनुपलब्धता के कारण बुलडोजर नहीं चल सका। प्रशासन अब पुलिस सहयोग मिलने के बाद आगे की कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है।

सड़क निर्माण में बाधा बन रही हैं झुग्गियां और मकान

एसडीएम पी.सी. पांडेय के अनुसार कजलीखेड़ा क्षेत्र में सड़क निर्माण और चौड़ीकरण का कार्य लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा किया जाना है। परियोजना के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने हेतु नियमानुसार झुग्गियों और प्रभावित मकानों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। हालांकि स्थानीय विरोध और सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता के कारण कार्रवाई को फिलहाल स्थगित करना पड़ा है।

रहवासियों की मांग – पहले सुरक्षित पुनर्वास, फिर हटाएं मकान

कजलीखेड़ा के प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे विकास कार्यों का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन उन्हें ऐसी जगह विस्थापित किया जा रहा है जहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। रहवासियों का आरोप है कि प्रशासन उन्हें जंगल क्षेत्र की एक पहाड़ी पर बसाने की तैयारी कर रहा है, जहां पानी, बिजली, सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।

स्थानीय निवासी राम सिंह लोधी और अन्य लोगों का कहना है कि जब तक सुरक्षित और सुविधायुक्त पुनर्वास की व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक वे अपने घर खाली नहीं करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि बिना उचित पुनर्वास के बुलडोजर कार्रवाई की गई तो उसका विरोध जारी रहेगा।

अर्जुन नगर के विस्थापित परिवारों का उदाहरण बना चिंता का कारण

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले महीने अयोध्या बायपास चौड़ीकरण परियोजना के तहत अर्जुन नगर क्षेत्र की 38 झुग्गियों को हटाया गया था। प्रभावित परिवारों को लगभग 25 किलोमीटर दूर लालपुरा गांव में स्थानांतरित किया गया, जहां बुनियादी सुविधाओं की कमी बताई जा रही है।

समाजसेविका आरती शर्मा के अनुसार विस्थापित परिवारों को रोजगार, शिक्षा और दैनिक जीवन की गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अधिकांश परिवार मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे, लेकिन दूरस्थ क्षेत्र में बसाए जाने के बाद उनके रोजगार के साधन भी प्रभावित हुए हैं।

विकास और पुनर्वास के बीच संतुलन की चुनौती

कजलीखेड़ा का मामला एक बार फिर विकास परियोजनाओं और मानवीय पुनर्वास के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को सामने लाता है। सड़क चौड़ीकरण और शहरी विकास कार्यों के लिए भूमि उपलब्ध कराना आवश्यक है, लेकिन प्रभावित परिवारों के लिए सम्मानजनक और सुविधायुक्त पुनर्वास सुनिश्चित करना भी प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मानी जा रही है। फिलहाल सभी की नजरें प्रशासन की आगामी कार्रवाई और पुनर्वास व्यवस्था पर टिकी हुई हैं।

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