मान्यता और गैर-मान्यता का विवाद खत्म कर शिक्षक हित में साथ आएं संगठन”
भोपाल। रेट्रोस्पेक्टिव TET मामले को लेकर देशभर में शिक्षकों और कर्मचारी संगठनों के बीच नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। शिक्षक हितों से जुड़े विभिन्न मंचों और संगठनों द्वारा अब सभी शिक्षक संगठनों से एकजुट होकर आंदोलन करने और संसद घेराव की रणनीति अपनाने की अपील की जा रही है। शिक्षकों का कहना है कि यह मामला केवल नौकरी का नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के भविष्य और अधिकारों से जुड़ा हुआ है।
शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों और आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि मान्यता प्राप्त और गैर-मान्यता प्राप्त संगठनों के बीच चल रही खींचतान से शिक्षक हित प्रभावित हो रहे हैं। उनका आरोप है कि संगठनात्मक अहंकार और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के कारण देशभर के लगभग 25 लाख शिक्षक और उनके परिवार असमंजस और संकट की स्थिति में पहुंच गए हैं।
“सिर्फ धरना-प्रदर्शन से नहीं निकलेगा समाधान”
आंदोलन से जुड़े शिक्षकों का कहना है कि अब केवल रैली और धरनों से समाधान निकलता दिखाई नहीं दे रहा है। इसलिए सभी संगठनों को एक मंच पर आकर राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा आंदोलन करना चाहिए। संसद घेराव की मांग को इसी रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है।
शिक्षकों का कहना है कि जब तक रेट्रोस्पेक्टिव TET से जुड़े विवाद का स्थायी समाधान नहीं निकलता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने इसे “नैसर्गिक न्याय और अधिकारों की लड़ाई” बताते हुए कहा कि शिक्षक समुदाय अंतिम स्तर तक अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाता रहेगा।
पुरानी पेंशन और नौकरी सुरक्षा का मुद्दा भी जुड़ा
आंदोलनकारी शिक्षकों ने यह भी कहा कि यदि पहले सभी संगठन एकजुट रहते तो पुरानी पेंशन योजना समाप्त नहीं होती और अब नौकरी पर संकट की स्थिति भी पैदा नहीं होती। शिक्षकों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में संगठनात्मक एकता ही सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।
मुख्यधारा मीडिया पर भी उठे सवाल
शिक्षक संगठनों से जुड़े लोगों ने मुख्यधारा मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शिक्षक और कर्मचारी वर्ग के मुद्दों को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं मिल रही है। इसलिए आंदोलन को मजबूत करने के लिए शिक्षकों को स्वयं संगठित होकर अपनी लड़ाई लड़नी होगी।
देशभर में रेट्रोस्पेक्टिव TET को लेकर शिक्षकों के बीच चिंता बनी हुई है। आने वाले समय में यदि विभिन्न संगठन एक मंच पर आते हैं, तो यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा आंदोलन बन सकता है।
रेट्रोस्पेक्टिव TET मामले में शिक्षकों की एकजुटता की मांग तेज, संसद घेराव की उठी आवाज
