भोपाल टाकीज क्षेत्र में फिर मंडरा रहा जलभराव का खतरा, नालों की सफाई पर उठे सवाल

अतिसंवेदनशील नालों की सफाई अभियान कागजों तक सीमित, जमीनी हकीकत में कचरे से अटे पड़े नाले

भोपाल, 26 जून

राजधानी भोपाल में मानसून दस्तक दे चुका है, लेकिन बारिश पूर्व नाला सफाई अभियान की जमीनी स्थिति कई इलाकों में सवालों के घेरे में है। हर साल बारिश के दौरान जलभराव से जूझने वाले भोपाल टाकीज क्षेत्र में इस बार भी हालात बिगड़ने की आशंका दिखाई दे रही है। क्षेत्र के प्रमुख नाले कचरे से भरे पड़े हैं और कई स्थानों पर सफाई कार्य अधूरा नजर आ रहा है।

Prajaparkhi reporter ने भोपाल टाकीज क्षेत्र पहुंचकर नालों की स्थिति का जायजा लिया और स्थानीय व्यापारियों एवं रहवासियों से चर्चा की। निरीक्षण में सामने आया कि से

फिया कॉलेज से निकलने वाला प्रमुख नाला, जो बाल विहार रहवासी क्षेत्र से होते हुए हमीदिया रोड के नीचे से इब्राहिम गंज, डीआईजी बंगला और आगे छोला क्षेत्र की ओर जाता है, कई स्थानों पर कचरे से भरा हुआ है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान यही नाला भोपाल टाकीज चौराहे पर जलभराव का बड़ा कारण बनता है, लेकिन मानसून से पहले इसकी पूरी तरह सफाई नहीं की गई है।

हमीदिया रोड के नीचे 150 फीट लंबे नाले की सफाई अधूरी

हमीदिया रोड के नीचे लगभग 150 फीट लंबा नाला बना हुआ है। स्थानीय व्यापारियों के अनुसार इस नाले की गहराई करीब 15 फीट और चौड़ाई लगभग 8 फीट है, लेकिन वर्षों से इसकी पूरी सफाई नहीं हो सकी है।

व्यापारियों ने बताया कि कुछ दिन पहले सड़क किनारे बने चैंबरों से लगभग दो डंपर कचरा निकाला गया था, लेकिन इतनी बड़ी संरचना वाले नाले के लिए यह सफाई पर्याप्त नहीं है।

वहीं इब्राहिम गंज क्षेत्र में जेसीबी से नाले की सफाई कराई गई, जहां बड़ी मात्रा में कचरा निकलने की जानकारी सामने आई।

भोपाल टाकीज चौराहे पर चारों तरफ से आता है पानी

भोपाल टाकीज चौराहा शहर के उन स्थानों में शामिल है जहां बारिश के दौरान चारों दिशाओं से पानी पहुंचता है। सेफिया कॉलेज और बाल विहार क्षेत्र से आने वाला नाला यदि पूरी क्षमता से पानी नहीं निकाल पाता है तो चौराहे पर जलभराव की स्थिति बन जाती है।

स्थानीय लोगों के अनुसार बारिश के समय नाले का कचरा पुलिया में फंस जाता है, जिससे पानी का बहाव रुक जाता है। इसके बाद पानी ओवरफ्लो होकर सड़क और चौराहे पर जमा हो जाता है।

इसके अलावा चौराहे की आसपास की नालियों की सफाई नहीं होने से भी जल निकासी प्रभावित होती है। शाहजहांनाबाद क्षेत्र के छोटे तालाब का ओवरफ्लो पानी भी कई बार भोपाल टाकीज क्षेत्र की ओर पहुंचता है।

शहर में 775 नाले, 200 संवेदनशील और 28 अतिसंवेदनशील

नगर निगम क्षेत्र में छोटे-बड़े लगभग 775 नाले बताए जाते हैं। इनमें करीब 200 नाले संवेदनशील श्रेणी में आते हैं, जबकि 28 नाले अतिसंवेदनशील माने जाते हैं।

इन अतिसंवेदनशील नालों से बारिश के दौरान सबसे अधिक जलभराव की समस्या उत्पन्न होती है। इनमें भोपाल टाकीज, टीला जमालपुरा, शिवाजी नगर स्थित 6 नंबर क्षेत्र, राहुल नगर, कोटरा सुल्तानाबाद, बाणगंगा, जोगीपुरा, बाग मुफ्ती साहब, महामाई, बाग उमराव, प्रभात चौराहा, बैरागढ़, साकेत नगर, जहांगीराबाद, कोलार, करोंद और छोला क्षेत्र के नाले प्रमुख हैं।

स्थानीय स्थिति को देखकर सवाल उठ रहे हैं कि यदि अतिसंवेदनशील नालों की सफाई इसी तरह अधूरी रही तो तेज बारिश के दौरान पुराने हालात दोहराए जा सकते हैं।

पिछले साल जलभराव के बाद सांसद और विधायक पहुंचे थे मौके पर

भोपाल टाकीज क्षेत्र में पिछले वर्ष भी बारिश के दौरान गंभीर जलभराव हुआ था। स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि चौराहे से आवागमन प्रभावित हो गया था।

जलभराव की सूचना मिलने के बाद जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे थे और नगर निगम की व्यवस्था पर नाराजगी जताई थी। इसके बाद निगम प्रशासन ने आनन-फानन में सफाई अभियान चलाकर राहत पहुंचाने का प्रयास किया था।

स्थानीय लोगों ने बताई नाले की हकीकत

इमरान खान, मैकेनिक, भोपाल टाकीज चौराहा ने बताया, “यहां मेरा बचपन गुजरा है। हर साल जलभराव की समस्या देखते हैं। नाले बने हुए हैं, लेकिन सफाई नहीं होने से पानी रुक जाता है। मोतिया तालाब का पानी और मछली पकड़ने के जाल भी बहकर नाले में फंस जाते हैं। प्रशासन को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे पानी सीधे छोला क्षेत्र की तरफ निकल सके।”

मुकेश कुमार, दुकानदार, हमीदिया रोड ने कहा, “पुलिया के ऊपर वाले हिस्से में नाले की सफाई नहीं हुई है। बारिश में कचरा पुलिया में भर जाता है और हर साल जलभराव की स्थिति बनती है।”

नरेश कुमार, हमीदिया रोड ने बताया, “यहां हर साल पानी भरता है। नाले और पुलिया की पूरी सफाई नहीं होने से बारिश का पानी निकल नहीं पाता।”

मुकेश भाटिया, विजय स्टेशनरी, हमीदिया रोड ने बताया, “नाले में सड़क के दोनों तरफ की नालियां जोड़ी गई हैं। पुलिया के बीच में सीसी दीवार बनी होने से पानी के बहाव में बाधा आती है। ऊपर से थर्माकॉल और कचरा आकर पुलिया जाम कर देते हैं, जिससे पानी दुकान में भर जाता है।”

बारिश से पहले अधूरी सफाई बनी चिंता का कारण

नगर निगम द्वारा मानसून पूर्व नाला सफाई अभियान कई महीनों से चलाए जाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन भोपाल टाकीज जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े करती है। अब तेज बारिश होने पर ही साफ होगा कि सफाई व्यवस्था कितनी प्रभावी रही है या फिर शहर को एक बार फिर जलभराव की समस्या से जूझना पड़ेगा।

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