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कार्यपालन यंत्री के पदों पर करंट चार्ज को लेकर विवाद, संघ ने उठाए सवाल

बोर्ड संवर्ग के लिए आरक्षित पदों पर अपात्र अधिकारियों को जिम्मेदारी देने का आरोप

भोपाल। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड में कार्यपालन यंत्री (डीजीएम) के पदों पर करंट चार्ज दिए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मध्यप्रदेश विद्युत मंडल पत्रोपाधि अभियंता संघ ने कंपनी प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष समीक्षा की मांग की है।

संघ का आरोप है कि शासन के निर्णयों के तहत मंडल (बोर्ड) संवर्ग के अधिकारियों के लिए आरक्षित कार्यपालन यंत्री के पदों पर कंपनी संवर्ग के ऐसे सहायक अभियंताओं को करंट चार्ज दिया गया है, जिन्हें हाल की पदोन्नति प्रक्रिया में नियमित रूप से कार्यपालन यंत्री पद पर पदोन्नति के लिए पात्र नहीं माना गया।

संघ के अनुसार, एक ओर विभाग ने संबंधित अधिकारियों को नियमित पदोन्नति के लिए पात्र नहीं माना, वहीं दूसरी ओर उन्हें उसी पद का करंट चार्ज सौंप दिया गया। संघ ने इस व्यवस्था को पदोन्नति प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रशासनिक औचित्य से जुड़ा मामला बताया है।

वित्तीय और प्रशासनिक निर्णय लेने का आरोप

संघ पदाधिकारियों का कहना है कि करंट चार्ज मिलने के बाद संबंधित अधिकारी कार्यपालन यंत्री के पद से जुड़े प्रशासनिक, तकनीकी और वित्तीय निर्णय ले रहे हैं। ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि उन्हें किस नियम और किस सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के आधार पर यह जिम्मेदारी दी गई।

वरिष्ठ अधिकारियों में असंतोष

संघ का कहना है कि बोर्ड संवर्ग के कई अधिकारी 35 से 38 वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद भी पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उनके लिए सुरक्षित पदों पर दूसरे संवर्ग के अधिकारियों को करंट चार्ज देने से पात्र अधिकारियों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं और उनमें असंतोष बढ़ रहा है।

मध्यप्रदेश विद्युत मंडल पत्रोपाधि अभियंता संघ भोपाल के प्रभारी अध्यक्ष केके आर्य ने राज्य शासन और विद्युत कंपनी प्रबंधन से बोर्ड संवर्ग के लिए आरक्षित कार्यपालन यंत्री पदों पर दिए गए सभी करंट चार्ज की निष्पक्ष समीक्षा कराने की मांग की है। संघ ने संबंधित आदेश सार्वजनिक करने और पात्र अधिकारियों को ही इन पदों की जिम्मेदारी देने की मांग भी की है।

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