सड़क चौड़ीकरण और आवास सुरक्षा के बीच फंसे ग्रामीण, प्रशासन से लगाई गुहार
भोपाल के कोलार रोड क्षेत्र स्थित कजलीखेड़ा और कालापानी इलाके में प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण परियोजना ने दर्जनों परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा सड़क निर्माण एवं चौड़ीकरण की तैयारी के बीच ग्रामीणों को 4 जून तक अतिक्रमण हटाने और प्रभावित निर्माणों को खाली करने संबंधी नोटिस दिए जाने की सूचना है। इसके बाद प्रभावित परिवार अपनी समस्या लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और पुनर्विचार की मांग की।
ग्रामीणों का कहना है कि जिन मकानों पर कार्रवाई की आशंका है, उनमें कुछ प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्मित आवास भी शामिल हैं, जबकि कई परिवार वर्षों से यहां निवास कर रहे हैं और कुछ के पास भूमि संबंधी दस्तावेज एवं पट्टे भी मौजूद हैं।
विकास परियोजनाओं में सबसे बड़ा सवाल: पुनर्वास पहले या हटाने की कार्रवाई?
भारत के विभिन्न शहरों में सड़क, मेट्रो, फ्लाईओवर और अन्य आधारभूत संरचना परियोजनाओं के दौरान सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की होती है। कजलीखेड़ा का मामला भी इसी बहस को आगे बढ़ाता है कि यदि सार्वजनिक विकास परियोजना के लिए भूमि की आवश्यकता है, तो प्रभावित नागरिकों के पुनर्वास, आजीविका और मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था किस प्रकार सुनिश्चित की जाएगी।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्हें जिस स्थान पर स्थानांतरित किए जाने की चर्चा है, वहां पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं है। वर्तमान में भी कई परिवारों को पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे में नए स्थान पर बसाए जाने से दैनिक जीवन और अधिक कठिन हो सकता है।
पीएम आवास योजना से जुड़े मकानों पर कार्रवाई क्यों संवेदनशील विषय है?
प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है। यदि किसी विकास परियोजना के दायरे में ऐसे आवास आते हैं, तो प्रशासन के सामने अतिरिक्त जिम्मेदारी होती है कि लाभार्थियों के अधिकारों और पुनर्वास की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए।
शहरी विकास और आवास नीति के विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सार्वजनिक परियोजना में प्रभावित परिवारों को पर्याप्त सूचना, वैकल्पिक व्यवस्था और कानूनी प्रक्रिया के तहत सुनवाई का अवसर मिलना चाहिए। इससे विकास कार्यों और सामाजिक न्याय के बीच संतुलन स्थापित किया जा सकता है।
ग्रामीणों का दावा: वैकल्पिक मार्ग पर भी हो सकता है विचार
प्रभावित परिवारों ने प्रशासन के समक्ष यह भी सुझाव रखा है कि सड़क निर्माण के लिए आसपास उपलब्ध शासकीय भूमि के विकल्पों का तकनीकी परीक्षण किया जाए। हालांकि सड़क की अंतिम डिजाइन और संरेखण (Alignment) का निर्णय संबंधित तकनीकी एजेंसियों और विभागों द्वारा ही किया जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि अधिकांश परिवार मजदूरी, सुरक्षा गार्ड और अन्य असंगठित क्षेत्रों में कार्यरत हैं। ऐसे में मकान टूटने की स्थिति में उनके लिए नए आवास का निर्माण आर्थिक रूप से बेहद कठिन होगा।
प्रशासन के सामने चुनौती: विकास और मानवीय सरोकारों का संतुलन
कलेक्टर प्रियंक मिश्रा से मुलाकात के दौरान प्रभावित परिवारों ने अपनी समस्याएं रखीं। प्रशासन की ओर से मामले की समीक्षा और नियमानुसार सहायता का आश्वासन दिया गया है।
भोपाल के कजलीखेड़ा में सड़क परियोजना से बढ़ी चिंता: पीएम आवास लाभार्थियों समेत कई परिवारों पर विस्थापन का खतरा
