सीएम हेल्पलाइन की बढ़ती शिकायतों पर सख्त हुए कलेक्टर: भोपाल में जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा संकेत

भोपाल। नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता का सबसे बड़ा पैमाना यह नहीं है कि योजनाएं कितनी बनाई गईं, बल्कि यह है कि आम लोगों की शिकायतों का समाधान कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से किया गया। भोपाल कलेक्ट्रेट में आयोजित समय-सीमा (टीएल) बैठक में यही मुद्दा केंद्र में रहा, जहां कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने लंबित शिकायतों और विभागीय लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया।
समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि विभिन्न विभागों में नागरिकों की शिकायतों का समय पर निराकरण नहीं हो रहा है। परिणामस्वरूप लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार तहसील, नजूल कार्यालय, कलेक्ट्रेट और जनसुनवाई के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। विशेष रूप से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से जुड़ी शिकायतों के निस्तारण में गंभीर ढिलाई को प्रशासन ने चिंता का विषय माना।
क्यों महत्वपूर्ण है सीएम हेल्पलाइन?
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन का उद्देश्य नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाए बिना शिकायत दर्ज कराने और उसके समाधान की निगरानी का अधिकार देना है। जब शिकायतें लंबित रहती हैं या औपचारिक रूप से बंद कर दी जाती हैं लेकिन जमीनी स्तर पर समाधान नहीं होता, तो जनता का भरोसा प्रभावित होता है।
भोपाल में समीक्षा बैठक के दौरान कलेक्टर ने स्पष्ट संकेत दिया कि यदि शिकायतकर्ता को अंततः जनसुनवाई तक पहुंचना पड़ रहा है, तो इसका अर्थ है कि संबंधित विभाग अपनी जिम्मेदारी का प्रभावी निर्वहन नहीं कर रहे हैं।
नगर निगम सबसे अधिक शिकायतों के घेरे में
बैठक में सबसे अधिक लंबित और विवादित शिकायतें नगर निगम से संबंधित पाई गईं। इनमें जल आपूर्ति, सफाई व्यवस्था, अतिक्रमण, सड़क मरम्मत, भवन अनुज्ञा और नागरिक सुविधाओं से जुड़े मामलों की संख्या अधिक बताई गई। इस पर कलेक्टर ने नगर निगम अधिकारियों के प्रति नाराजगी व्यक्त करते हुए लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, अब शिकायतों की नियमित मॉनिटरिंग के साथ विभागवार जवाबदेही तय करने पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि समस्या केवल फाइलों में बंद न हो बल्कि वास्तविक समाधान तक पहुंचे।
जमीन और लोक सेवा गारंटी मामलों पर भी सख्ती
बैठक में राजस्व और भूमि संबंधी मामलों की भी विस्तृत समीक्षा की गई। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, भूमि अभिलेख संशोधन तथा अन्य राजस्व प्रकरणों में अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा।
लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत आने वाली सेवाओं में देरी को भी गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना गया। संबंधित अधिकारियों को चेतावनी दी गई कि समयसीमा का पालन नहीं होने पर कारण बताओ नोटिस के साथ आर्थिक दंड जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।
शिक्षा और पीएचई विभाग भी रडार पर
समीक्षा बैठक के दौरान शिक्षा विभाग और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग की कार्यप्रणाली पर भी असंतोष व्यक्त किया गया। कई मामलों में अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने पर कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए और कार्यप्रणाली में तत्काल सुधार लाने को कहा।



