ICJS तकनीक से आरपीएफ भोपाल की बड़ी सफलता, हुलिया-पता और नाम बदलने वाले तीन आरोपियों को पकड़ा

डिजिटल पुलिसिंग से गैर-जमानती वारंटों के निष्पादन में आई तेजी

भोपाल। आधुनिक तकनीक के उपयोग से कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) के प्रभावी उपयोग से आरपीएफ ने ऐसे आरोपियों तक पहुंच बनाई, जो हुलिया बदलकर, निवास स्थान बदलकर या अपनी पहचान छिपाकर कानून की पकड़ से बचने का प्रयास कर रहे थे।

वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त डॉ. अभिषेक के मार्गदर्शन में तथा निरीक्षक मनीष कुमार और उप निरीक्षक प्रकाश रघुवंशी के नेतृत्व में आरपीएफ पोस्ट भोपाल ने तीन महत्वपूर्ण गैर-जमानती वारंटों का सफलतापूर्वक निष्पादन किया।

ICJS बना जांच और गिरफ्तारी का मजबूत माध्यम

इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से पुलिस, न्यायालय, जेल, अभियोजन और अन्य आपराधिक न्याय संस्थाओं के रिकॉर्ड एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होते हैं।

इस प्रणाली की मदद से आरोपियों के नवीनतम फोटो, आपराधिक रिकॉर्ड, वर्तमान पता, जेल स्थिति और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां तुरंत प्राप्त की जा सकती हैं। इससे जांच और वारंट निष्पादन की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हुई है।

हुलिया बदलने के बाद भी आरोपी पहुंचा पुलिस की पकड़ में

आरपीएफ पोस्ट भोपाल में दर्ज अपराध क्रमांक 26/2015 में आरोपी पप्पू उर्फ मुन्ना के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी था। आरोपी के बदले हुए हुलिये के कारण उसकी पहचान करना चुनौतीपूर्ण था।

ICJS के माध्यम से आरोपी का नवीनतम फोटो और आपराधिक रिकॉर्ड प्राप्त किया गया। इसके बाद स्थानीय सूचना और फील्ड सत्यापन के आधार पर आरोपी को 21 अप्रैल 2026 को सुखी सेवनिया क्षेत्र के बालमपुर स्थित चंद्रा ढाबा से गिरफ्तार किया गया।

पुराने पते की जगह नए ठिकाने से हुई गिरफ्तारी

अपराध क्रमांक 05/2022 में आरोपी आबिद अली के विरुद्ध जारी गैर-जमानती वारंट के निष्पादन के दौरान आरपीएफ को पता चला कि रिकॉर्ड में दर्ज पता पुराना है।

ICJS से आरोपी का अद्यतन पता प्राप्त कर स्थानीय पुलिस की मदद से सत्यापन किया गया और आरोपी को 2 अप्रैल 2026 को उसके वर्तमान निवास स्थान से गिरफ्तार किया गया।

नाम बदलकर छिपने वाले आरोपी की हुई पहचान

अपराध क्रमांक 20/2016 में वांछित आरोपी मोहम्मद खालिद ने पहचान छिपाने के लिए नया नाम अपना लिया था। ICJS रिकॉर्ड, पिता के नाम, फोटो मिलान और स्थानीय जांच के आधार पर उसकी पहचान सुनिश्चित की गई।

इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर 9 अप्रैल 2026 को रेलवे न्यायालय भोपाल में प्रस्तुत किया गया।

वारंट निष्पादन में तकनीक से आया बड़ा बदलाव

आरपीएफ भोपाल के अनुसार, ICJS के उपयोग से वारंट निष्पादन की प्रक्रिया में कई स्तरों पर सुधार हुआ है। इससे:

आरोपियों की पहचान अधिक सटीक तरीके से संभव हुई।

पुराने और गलत पतों की समस्या का समाधान हुआ।

आपराधिक इतिहास तक तत्काल पहुंच मिली।

विभिन्न राज्यों और जिलों की पुलिस एजेंसियों के साथ समन्वय बेहतर हुआ।

निगरानी और जवाबदेही व्यवस्था मजबूत हुई।


तकनीक आधारित पुलिसिंग का मॉडल बन रहा भोपाल मंडल

वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त डॉ. अभिषेक ने कहा कि ICJS आधुनिक कानून प्रवर्तन व्यवस्था में एक प्रभावी “फोर्स मल्टीप्लायर” के रूप में काम कर रहा है। यह प्रणाली हुलिया परिवर्तन, पता परिवर्तन और नाम बदलने जैसी चुनौतियों से निपटने में मददगार साबित हो रही है।

भोपाल मंडल आरपीएफ की यह उपलब्धि दिखाती है कि डिजिटल तकनीक के उपयोग से न्यायिक प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और परिणाम आधारित बनाया जा सकता है। यह पहल रेलवे सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ व्यापक आपराधिक न्याय प्रणाली के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण बनकर सामने आई है।

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