मध्यप्रदेश की आत्मा परियोजना में संविदा कर्मचारियों को बड़ी राहत, तीन साल बाद लागू हुई वेतन समकक्षता

मध्यप्रदेश के कृषि विभाग की आत्मा परियोजना में कार्यरत संविदा कर्मचारियों के लिए लंबे इंतजार के बाद महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसला सामने आया है। विभाग ने वेतन समकक्षता निर्धारण के आदेश जारी कर दिए हैं, जिससे प्रदेशभर के लगभग 450 संविदा कर्मचारियों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिलेगा।
यह फैसला केवल वेतन वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य में संविदा कर्मचारियों की सेवा शर्तों और प्रशासनिक समानता की बहस को भी नई दिशा देता है।
तीन साल बाद लागू हुआ आदेश
मामले की पृष्ठभूमि वर्ष 2023 से जुड़ी है, जब मध्यप्रदेश सामान्य प्रशासन विभाग ने संविदा कर्मचारियों को नियमित पदों के अनुरूप न्यूनतम वेतन देने संबंधी निर्देश जारी किए थे। लेकिन कृषि विभाग की आत्मा योजना में कार्यरत कर्मचारियों को इसका लाभ लंबे समय तक नहीं मिल सका।
संविदा कर्मचारी संगठनों का आरोप था कि आदेश जारी होने के बावजूद विभागीय स्तर पर क्रियान्वयन में लगातार देरी होती रही। इस दौरान कई ज्ञापन, आंदोलन और प्रतिनिधिमंडल बैठकों के माध्यम से सरकार पर दबाव बनाया गया।
अब जारी हुए नए आदेशों के बाद ब्लॉक टेक्नोलॉजी मैनेजर, असिस्टेंट टेक्नोलॉजी मैनेजर, लेखापाल-सह-लिपिक और डाटा एंट्री ऑपरेटर जैसे पदों पर कार्यरत कर्मचारियों के वेतन में लगभग 5 से 7 हजार रुपये प्रतिमाह तक की वृद्धि होगी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार आत्मा (ATMA – Agricultural Technology Management Agency) परियोजना राज्य में कृषि विस्तार सेवाओं की रीढ़ मानी जाती है। यही कर्मचारी किसानों तक नई कृषि तकनीक, प्रशिक्षण, फसल प्रबंधन और सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाने का काम करते हैं।
लेकिन विडंबना यह रही कि किसानों को आधुनिक कृषि से जोड़ने वाले ये कर्मचारी स्वयं लंबे समय से वेतन असमानता और नौकरी अस्थिरता का सामना कर रहे थे।
विशेषज्ञ मानते हैं कि बेहतर वेतन और सेवा सुरक्षा मिलने से ग्रामीण कृषि तंत्र की कार्यक्षमता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इससे फील्ड स्तर पर कर्मचारियों का मनोबल भी बढ़ेगा और योजनाओं के क्रियान्वयन में स्थिरता आएगी।
संविदा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
यह मामला एक बार फिर मध्यप्रदेश की व्यापक संविदा रोजगार व्यवस्था को चर्चा में ले आया है। राज्य के स्वास्थ्य, शिक्षा, पंचायत और कृषि विभागों में हजारों कर्मचारी वर्षों से संविदा आधार पर कार्य कर रहे हैं। इनमें से कई विभागों में समान कार्य के बावजूद वेतन और सुविधाओं में बड़ा अंतर बना हुआ है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यदि सरकार ने एक बार समकक्षता का सिद्धांत स्वीकार कर लिया है, तो इसे सभी विभागों में समान रूप से लागू किया जाना चाहिए।
इस संबंध में रमेश राठौड़ ने कहा कि यह फैसला लंबे संघर्ष का परिणाम है और इससे कर्मचारियों को आर्थिक राहत मिलेगी। वहीं डॉ. बैजनाथ सिंह यादव ने इसे संविदा कर्मचारियों के अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
आगे क्या असर दिख सकता है?
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इस निर्णय के बाद अन्य विभागों के संविदा कर्मचारी भी वेतन समकक्षता को लेकर अधिक सक्रिय हो सकते हैं। आने वाले समय में राज्य सरकार पर संविदा नीति की व्यापक समीक्षा का दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है।
फिलहाल आत्मा परियोजना के कर्मचारियों के लिए यह फैसला केवल वेतन वृद्धि नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही प्रशासनिक उपेक्षा के खिलाफ एक महत्वपूर्ण मान्यता के रूप में देखा जा रहा है।



