
पहली ही बारिश ने प्रशासनिक तैयारियों पर खड़े किए सवाल
भोपाल, 4 जून। राजधानी भोपाल में गुरुवार को हुई लगभग एक घंटे की तेज बारिश और आंधी ने नगर निगम तथा बिजली विभाग की तैयारियों की वास्तविक स्थिति सामने ला दी। मानसून पूर्व नालों की सफाई, पेड़ों की छंटाई और बिजली व्यवस्था के रखरखाव पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के दावों के बावजूद शहर के अधिकांश हिस्सों में जलभराव, बिजली कटौती और यातायात बाधित होने की स्थिति बन गई। कई प्रमुख मार्गों पर पानी भरने और पेड़ों की शाखाएं टूटकर गिरने से आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
300 से अधिक फीडर बंद, एक घंटे तक अंधेरे में डूबा शहर
बारिश और तेज हवाओं के कारण राजधानी के लगभग 300 बिजली फीडर बंद हो गए। इसके चलते गोविंदपुरा, अशोका गार्डन, बीएचईएल, एमपी नगर, न्यू मार्केट, कोलार रोड और अन्य कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित रही। कई इलाकों में करीब एक घंटे तक अंधेरा छाया रहा। उल्लेखनीय है कि शहर की विद्युत व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए पिछले वर्षों में लगभग 800 करोड़ रुपये खर्च कर भूमिगत केबलिंग, नए ट्रांसफार्मर और अन्य सुविधाएं विकसित की गई थीं, लेकिन पहली ही तेज बारिश में यह व्यवस्था प्रभावित होती दिखाई दी।
पेड़ों की टहनियां टूटने से कई मार्गों पर लगा जाम
नगर निगम द्वारा बारिश से पूर्व पेड़ों की छंटाई और रखरखाव के लिए विशेष अभियान चलाया जाता है। इसके बावजूद आंधी के दौरान शहर में सैकड़ों स्थानों पर पेड़ों की शाखाएं टूटकर सड़कों पर गिर गईं। प्रोफेसर कॉलोनी, पॉलीटेक्निक चौराहा, लिंक रोड नंबर-1, 2 और 3, कोलार रोड, अवधपुरी तथा तुलसीनगर सहित कई इलाकों में यातायात प्रभावित हुआ। कई मार्गों पर जाम जैसी स्थिति बन गई और लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ा।
नालों की सफाई के दावों की खुली पोल
हर वर्ष की तरह इस बार भी नगर निगम ने मानसून पूर्व नालों की सफाई का व्यापक अभियान चलाने का दावा किया था। हालांकि मात्र एक घंटे की बारिश में ही शहर के कई निचले क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बन गई। पुराने भोपाल के भोपाल टॉकीज क्षेत्र, अशोका गार्डन, प्रेस कॉम्प्लेक्स और अन्य संवेदनशील इलाकों में सड़कें पानी से लबालब नजर आईं। कई कॉलोनियों और मुख्य मार्गों पर पानी भरने से लोगों का आवागमन प्रभावित हुआ।
नागरिकों ने उठाए जवाबदेही के सवाल
पहली ही बारिश में बिजली व्यवस्था चरमराने, सड़कों पर जलभराव और पेड़ों के गिरने की घटनाओं ने प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि प्री-मानसून कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं तो उनका प्रभाव जमीनी स्तर पर दिखाई देना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कागजी तैयारियों के बजाय प्रभावी निगरानी और गुणवत्ता पूर्ण कार्य ही मानसून के दौरान शहर को राहत दे सकते हैं।




