भोपाल स्लॉटर हाउस विवाद: जांच समिति का इंतजार जारी, संचालन की तैयारी ने उठाए नए सवाल

भोपाल। राजधानी के बहुचर्चित स्लॉटर हाउस मामले में जांच और कार्रवाई के बीच बढ़ता अंतर अब प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रहा है। करीब चार महीने पहले उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने की मांग उठी थी, लेकिन अब तक समिति का गठन नहीं हो पाया है। वहीं दूसरी ओर नगर निगम ने स्लॉटर हाउस को दोबारा शुरू करने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ाते हुए पुलिस विभाग से अभिमत मांगा है।

निगम आयुक्त द्वारा पुलिस आयुक्त को भेजे गए पत्र के बाद यह सवाल उठ रहा है कि जब मामले में अनियमितताओं और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच लंबित है, तो संचालन को लेकर निर्णय प्रक्रिया क्यों आगे बढ़ाई जा रही है।

जांच समिति बनी नहीं, संचालन की प्रक्रिया शुरू

स्लॉटर हाउस विवाद सामने आने के बाद नगर निगम परिषद में मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठी थी। परिषद अध्यक्ष ने निगम आयुक्त को उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए थे।

इसके बाद नगरीय प्रशासन विभाग को पांच सदस्यीय जांच समिति बनाने के लिए पत्र भेजे जाने की बात सामने आई थी, लेकिन शासन स्तर पर अभी तक समिति का गठन नहीं हुआ है।

इस देरी के बीच हाईकोर्ट के आदेश के संदर्भ में नगर निगम ने स्लॉटर हाउस संचालन को लेकर पुलिस विभाग से कानून व्यवस्था और अन्य पहलुओं पर अभिमत मांगा है। अब यदि पुलिस विभाग की ओर से अनुमति संबंधी सकारात्मक अभिमत आता है तो संचालन का रास्ता साफ हो सकता है।

विवाद की शुरुआत और कार्रवाई का घटनाक्रम

स्लॉटर हाउस मामला दिसंबर 2025 में उस समय सुर्खियों में आया, जब 26 टन मांस से भरा कंटेनर पकड़ा गया था। इसके बाद जांच रिपोर्ट में 7 जनवरी 2026 को मांस को लेकर गंभीर सवाल सामने आए।

मामले के बाद स्लॉटर हाउस को सील किया गया। संचालक असलम चमड़ा सहित दो लोगों पर कार्रवाई की गई। नगर निगम के कर्मचारियों और पशु चिकित्सा विभाग से जुड़े अधिकारियों पर भी निलंबन की कार्रवाई हुई थी।

जांच के दौरान स्लॉटर हाउस से जुड़े दस्तावेजों में अनियमितताओं के आरोप भी सामने आए थे। इन्हीं बिंदुओं को लेकर नगर निगम अधिकारियों और संबंधित लोगों की भूमिका की विस्तृत जांच की मांग की गई थी।

परिषद में उठे थे कई गंभीर सवाल

13 जनवरी को हुई नगर निगम परिषद की बैठक में स्लॉटर हाउस मामले को लेकर उच्चस्तरीय जांच समिति बनाने का प्रस्ताव और निर्देश दिए गए थे।

बैठक में यह मुद्दा भी उठाया गया था कि स्लॉटर हाउस शुरू करने की अनुमति देने से पहले परिषद में पर्याप्त चर्चा नहीं की गई। इसके बाद विपक्ष और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन किए थे।

जनप्रतिनिधियों ने जताई नाराजगी

नगर निगम परिषद अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने कहा,
“भोपाल को मांस की मंडी नहीं बनने देंगे। स्लॉटर हाउस चालू नहीं होगा।”

भाजपा विधायक ने भी मामले में जांच की मांग करते हुए कहा कि स्लॉटर हाउस किसी भी स्थिति में शुरू नहीं होना चाहिए और गौकसी मामले में दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

वहीं महापौर ने कहा कि पुलिस आयुक्त को भेजे गए पत्र की जानकारी उनके संज्ञान में नहीं है और वह इसे दिखवाएंगी।

प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती: विश्वास बहाली

स्लॉटर हाउस जैसे संवेदनशील विषय में केवल कानूनी प्रक्रिया पूरी करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि जनता का विश्वास बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी संस्थान पर गंभीर आरोप लगे हों तो स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही आगे की कार्रवाई अधिक पारदर्शी मानी जाती है।

वर्तमान स्थिति में नगर निगम के सामने दोहरी चुनौती है—एक ओर न्यायालय के निर्देशों का पालन करना और दूसरी ओर मामले से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि शासन स्तर पर जांच समिति कब गठित होती है और स्लॉटर हाउस संचालन को लेकर नगर निगम अंतिम निर्णय किस आधार पर लेता है।

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