भोपाल। मानसून से पहले जलस्रोतों और कैचमेंट क्षेत्रों को अतिक्रमण मुक्त बनाने के अभियान के तहत जिला प्रशासन ने सोमवार को कलियासोत डैम के आसपास बड़ी कार्रवाई करते हुए शासकीय भूमि पर संचालित डेयरियों के अवैध निर्माण हटाए। सिंहपुर गांव में वर्षों से बने भैंसों के तबेलों और चारे के शेडों पर जेसीबी चलाकर अतिक्रमण समाप्त किया गया।
प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई जलग्रहण क्षेत्र (कैचमेंट एरिया) की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से की गई है। विशेष रूप से मानसून के दौरान ऐसे क्षेत्रों में अवैध निर्माण जल निकासी और जल संरक्षण व्यवस्था को प्रभावित करते हैं।
कलियासोत किनारे बने थे अवैध तबेले
टीटी नगर नजूल वृत्त के अंतर्गत आने वाले सिंहपुर गांव में, जो खुशीलाल शर्मा शासकीय चिकित्सालय के पीछे स्थित है, लंबे समय से डेयरी गतिविधियां संचालित हो रही थीं। यहां शासकीय भूमि पर भैंसों के तबेले, चारा भंडारण शेड और अन्य अस्थायी संरचनाएं निर्मित कर ली गई थीं।
सोमवार को प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर लगभग 15 तबेलों और भूसा रखने के शेडों को हटाया। कार्रवाई के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारी, स्थानीय प्रशासन और मशीनरी की मौजूदगी रही।
हाईकोर्ट और एनजीटी के निर्देशों के बाद तेज हुई कार्रवाई
भोपाल के बड़े जलाशयों, तालाबों और कैचमेंट क्षेत्रों में अतिक्रमण हटाने को लेकर पूर्व में न्यायालयों और पर्यावरणीय संस्थाओं द्वारा भी सख्त निर्देश दिए जा चुके हैं। इसी क्रम में प्रशासन द्वारा जलग्रहण क्षेत्रों की पहचान कर अतिक्रमण मुक्त करने का अभियान चलाया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कैचमेंट क्षेत्र किसी भी जलाशय की जीवनरेखा होते हैं। यहां होने वाला अनियंत्रित निर्माण जल संग्रहण क्षमता को प्रभावित करता है और पर्यावरणीय संतुलन पर भी असर डाल सकता है।
दो माह पहले दिया गया था स्वयं हटाने का अवसर
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार अप्रैल माह में ही संबंधित डेयरी संचालकों को अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए थे। उस समय कार्रवाई के दौरान डेयरी संचालकों ने स्वयं निर्माण हटाने के लिए समय मांगा था।
अधिकारियों का कहना है कि निर्धारित समय बीतने के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाया गया, जिसके बाद प्रशासन को बलपूर्वक कार्रवाई करनी पड़ी। यह कदम राजस्व अभिलेखों और नियमानुसार प्रक्रिया पूरी करने के बाद उठाया गया।
मानसून से पहले सुरक्षा पर फोकस
प्रशासन का मानना है कि बारिश के मौसम में कैचमेंट क्षेत्रों में अवैध निर्माण कई तरह के जोखिम पैदा कर सकते हैं। जलभराव, मिट्टी कटाव, पशुओं और लोगों की सुरक्षा से जुड़े खतरे बढ़ जाते हैं। इसी कारण मानसून पूर्व ऐसे क्षेत्रों की विशेष निगरानी की जा रही है।
टीटी नगर नजूल वृत्त के तहसीलदार कुणाल राउत के अनुसार, बारिश के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या पर्यावरणीय नुकसान से बचने के लिए नियमानुसार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई है।
जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में कदम
भोपाल की पहचान उसके तालाबों और जलस्रोतों से जुड़ी रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कैचमेंट क्षेत्रों को अतिक्रमण मुक्त रखा जाए तो जलाशयों की जलधारण क्षमता बढ़ती है और भूजल पुनर्भरण की प्रक्रिया भी बेहतर होती है।
प्रशासन द्वारा की गई यह कार्रवाई केवल भूमि मुक्त कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और शहरी नियोजन से जुड़ी दीर्घकालिक पहल के रूप में भी देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में शहर के अन्य संवेदनशील जलग्रहण क्षेत्रों में भी इसी प्रकार की कार्रवाई जारी रहने की संभावना है।
कलियासोत कैचमेंट क्षेत्र में चला प्रशासन का बुलडोजर, शासकीय भूमि से हटाए गए डेयरी अतिक्रमण
