State

आचार्य समय सागर महाराज ने कहा- स्वयं को स्वयं में स्थिर करना ही साधना

भोपाल। निर्माणाधीन विद्योदय तीर्थ परिसर देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए श्रद्धा और भक्ति का केंद्र बना हुआ है। यहां आचार्य समय सागर महाराज ससंघ वर्षायोग में तप, त्याग और संयम की साधना कर रहे हैं। सुबह से ही आध्यात्मिक क्रियाओं के साथ मुनि संघ की साधना शुरू हो जाती है।

आचार्य श्री प्रतिदिन जैन दर्शन और जैन सिद्धांतों को लेकर मुनि संघ, ब्रह्मचारी भैया-बहनों तथा प्रतिमाधारी व्रतियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि साधना की शुरुआत सांसारिक संकल्प-विकल्पों को दूर करने से होती है। स्वयं को स्वयं में स्थिर करना ही साधना है। सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र मोक्ष का सोपान हैं।

आचार्य श्री ने कहा कि संकल्प-विकल्प केवल्य ज्ञान की प्राप्ति में बाधक हैं। आगम का आलंबन लिए बिना श्रमण की साधना अनुकूल नहीं हो सकती। लिखित आगम जैन सिद्धांत का मूल है और शब्द का उच्चारण संवेदना का वाहक है।

बाहर से आए व्रतियों का किया बहुमान

वर्षायोग में बाहर से आए व्रतियों का बहुमान अध्यक्ष पंकज जैन सुपारी, मनोज बांगा और ओएसडी राकेश ने किया। आयोजन समिति के प्रवक्ता अंशुल जैन ने बताया कि मुख्य चातुर्मास कलश स्थापित करने वाले सौभाग्यशाली परिवार भी प्रतिदिन आचार्य संघ के सानिध्य में पूजा-अर्चना और अनुष्ठान में शामिल हो रहे हैं।

इनमें देवेन्द्र-रुचि पदम जैन, मनोज जैन कोयला, पंकज सुपारी, मनोज बांगा, पवन सुपारी, ऋषभ-मनीष और प्रगति सहित अन्य पुण्यार्जक परिवार शामिल हैं।

15 अगस्त को विशेष प्रवचन

प्रवक्ता अंशुल जैन ने बताया कि 15 अगस्त को परिसर में विशेष प्रवचन आयोजित होंगे। इसमें राष्ट्र के प्रति दायित्वों के निर्वहन के लिए सामूहिक संकल्प लिया जाएगा। आचार्य श्री भारत की आजादी की कीमत और देश के विकास में नागरिकों की भूमिका को लेकर आशीर्वचन देंगे।

Related Articles