सैंडबोआ (दो मुंहा सांप) की तस्करी मामले में आरोपी को 3 साल की सजा

वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत न्यायालय ने लगाया ₹2000 का अर्थदंड

भोपाल, 29 जून । वन्य प्राणी सैंडबोआ (दो मुंहा सांप) की तस्करी के मामले में न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष के सश्रम कारावास और ₹2000 के अर्थदंड की सजा सुनाई है।

भोपाल के तेईसवें अपर सत्र न्यायाधीश श्री सचिन जैन की अदालत ने आरोपी प्रतीक सिंह बोहरा को वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 51(1) के तहत सहपठित भारतीय दंड संहिता धारा 120-बी में दोषी मानते हुए यह फैसला सुनाया।

इस मामले में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक आकिल अहमद खान और सुधाविजय सिंह भदौरिया ने पैरवी की।

मुखबिर की सूचना पर हुई थी कार्रवाई

अभियोजन के अनुसार, 7 जनवरी 2016 को पुलिस थाना एसटीएफ भोपाल को सूचना मिली थी कि गुलमोहर स्थित मिनाल इन्क्लेव क्षेत्र के पास कुछ लोग काले रंग की सफारी गाड़ी में सैंडबोआ (दो मुंहा सांप) बेचने की कोशिश कर रहे हैं।

सूचना के आधार पर एसटीएफ पुलिस टीम ने वन विभाग के वनपाल और वनरक्षक के साथ मौके पर पहुंचकर जांच की। वहां एक संदिग्ध काले रंग की सफारी कार क्रमांक एमपी 04 सीएन 8442 खड़ी मिली, जिसमें पांच लोग मौजूद थे।

पूछताछ में आरोपियों ने अपना नाम अमन उर्फ हनी, लोकेश उर्फ मलिक, विजय उर्फ विज्जू, प्रतीक बोहरा और ब्रजेश पटेल बताया।

बैग से मिला था प्रतिबंधित वन्य जीव

तलाशी के दौरान आरोपियों के पास मौजूद एक बैग में एक सैंडबोआ (दो मुंहा सांप) बरामद हुआ। वन विभाग के परीक्षण में सांप की लंबाई करीब 114 सेंटीमीटर, मोटाई करीब 12 सेंटीमीटर और वजन लगभग 2 किलोग्राम पाया गया था।

मामले में एसटीएफ थाना भोपाल ने अपराध क्रमांक 01/2016 दर्ज कर वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत जांच शुरू की थी। विवेचना पूरी होने के बाद अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

साक्ष्यों के आधार पर सुनाया गया फैसला

न्यायालय ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, दस्तावेजों और तर्कों से सहमत होते हुए आरोपी प्रतीक सिंह बोहरा को दोषी पाया और तीन वर्ष के सश्रम कारावास तथा ₹2000 अर्थदंड की सजा सुनाई।

वन्य जीवों की तस्करी पर रोक लगाने के लिए वन विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई को ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि दुर्लभ प्रजातियों की अवैध बिक्री जैव विविधता के लिए गंभीर खतरा पैदा करती है।

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