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भोपाल में अभियोजन अधिकारियों और लोक अभियोजकों की संभागीय कार्यशाला आयोजित, महिला एवं बाल अपराधों में प्रभावी अभियोजन पर दिया गया प्रशिक्षण

अपर मुख्य सचिव गृह संजय शुक्ला बोले— एसओपी के आधार पर हो प्रभावी पैरवी, आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता से बढ़ेगी दोषसिद्धि

भोपाल। महिला एवं बच्चों के विरुद्ध अपराधों में प्रभावी और कुशल अभियोजन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शनिवार को भोपाल में अभियोजन अधिकारियों एवं लोक अभियोजकों की एक दिवसीय संभागीय कार्यशाला आयोजित की गई। होटल सयाजी में आयोजित इस कार्यशाला में भोपाल संभाग के विभिन्न जिलों के अभियोजन अधिकारियों और लोक अभियोजकों ने भाग लेकर कानून, साइबर अपराध, फोरेंसिक साक्ष्य और विशेष अधिनियमों से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञों से प्रशिक्षण प्राप्त किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय शुक्ला थे, जबकि लोक अभियोजन संचालनालय के संचालक बी.एल. प्रजापति और भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

एसओपी आधारित पैरवी पर दिया जोर

अपने संबोधन में अपर मुख्य सचिव गृह संजय शुक्ला ने कहा कि अभियोजन अधिकारियों को प्रत्येक प्रकरण में स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के अनुरूप तैयारी कर प्रभावी पैरवी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अभियोजन प्रणाली को और अधिक पेशेवर एवं परिणामोन्मुख बनाने की आवश्यकता है तथा इस दिशा में आधुनिक कार्यप्रणाली अपनाई जानी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि अभियोजन विभाग में सुविधाओं के विस्तार और नए पदों के सृजन से संबंधित प्रक्रियाओं को शीघ्र पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

अभियोजन विभाग के बेहतर प्रदर्शन पर जताया संतोष

लोक अभियोजन संचालनालय के संचालक बी.एल. प्रजापति ने कहा कि अभियोजन अधिकारियों के समन्वित प्रयासों से विभाग लगातार बेहतर कार्य कर रहा है। उन्होंने अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कानूनी कार्रवाई और दोषसिद्धि दर में सुधार के लिए गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान और प्रभावी पैरवी को आवश्यक बताया।

उन्होंने कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए प्रभारी उप संचालक राजेंद्र उपाध्याय और उनकी टीम को बधाई भी दी।

साइबर अपराध, ई-साक्ष्य और फोरेंसिक पर विशेषज्ञों ने दिया प्रशिक्षण

कार्यशाला में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त शैलेंद्र सिंह चौहान ने महिला एवं बच्चों के विरुद्ध साइबर अपराध, मोबाइल फोरेंसिक तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के प्रभावी उपयोग पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया।

वहीं मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष निवेदिता शर्मा ने पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) और किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act) के महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों पर जानकारी साझा की।

सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश डी.के. श्रीवास्तव ने पॉक्सो मामलों में प्रभावी पैरवी के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों तथा अभियोजन की रणनीतियों पर महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया।

पूर्व मेडिको-लीगल संचालक डी.एस. बड़कुर ने महिला अपराधों की जांच में फोरेंसिक विज्ञान और डीएनए साक्ष्य की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी।

संभाग के विभिन्न जिलों के अधिकारी रहे उपस्थित

कार्यशाला में भोपाल, सीहोर, रायसेन, राजगढ़ और विदिशा जिलों के लोक अभियोजक एवं अभियोजन अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम में राज्य और जिला स्तर के कई वरिष्ठ अभियोजन अधिकारियों ने भी सहभागिता की।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रभारी उप संचालक राजेंद्र उपाध्याय द्वारा अतिथियों के स्वागत से हुई। उन्होंने सभी विशेषज्ञों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम का संचालन अतिरिक्त जिला लोक अभियोजन अधिकारी (एडीपीओ) सिमी रत्नम एवं जागृति पांडेय ने किया।

यह कार्यशाला महिला एवं बाल अपराधों से जुड़े मामलों में अभियोजन अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने, आधुनिक जांच तकनीकों की समझ विकसित करने और न्यायालयों में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

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