कृषि अनुसंधान में लैंगिक दृष्टिकोण पर 397 प्रतिभागियों ने लिया ऑनलाइन प्रशिक्षण

भुवनेश्वर। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)-केंद्रीय कृषिरत महिला संस्थान, भुवनेश्वर (ICAR-CIWA) की ओर से 10 से 12 अगस्त 2026 तक “सतत कृषि-खाद्य प्रणालियों हेतु लैंगिक परिप्रेक्ष्य के साथ कृषि अनुसंधान का सुदृढ़ीकरण” विषय पर तीन दिवसीय ऑनलाइन प्रशिक्षण आयोजित किया गया।
कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के वैज्ञानिकों और विषय-वस्तु विशेषज्ञों के लिए आयोजित प्रशिक्षण में ICAR-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (ATARI) के जोन-I लुधियाना, जोन-V कोलकाता, जोन-VI गुवाहाटी और जोन-VII उमियाम के अंतर्गत आने वाले विभिन्न कृषि विज्ञान केंद्रों से 397 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में 28 राज्यों के प्रतिभागी जुड़े।
कृषि अनुसंधान में लैंगिक दृष्टिकोण पर जोर
प्रशिक्षण का उद्देश्य कृषि अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार प्रणाली में लैंगिक दृष्टिकोण को मुख्यधारा में शामिल करना और संस्थागत क्षमता को मजबूत करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ 10 अगस्त को ICAR के सहायक महानिदेशक (कृषि विस्तार) डॉ. आर. आर. बर्मन और डॉ. रंजय कुमार सिंह ने किया। ICAR-CIWA की निदेशक डॉ. मृदुला देवी ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कृषि-खाद्य प्रणालियों को अधिक समावेशी, संवेदनशील और सतत बनाने के लिए कृषि अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार गतिविधियों में लैंगिक दृष्टिकोण को शामिल करने पर जोर दिया।
डॉ. आर. आर. बर्मन ने कहा कि सतत कृषि विकास के लिए कृषि विशेषज्ञों को जेंडर-रेस्पॉन्सिव दृष्टिकोण अपनाने और उसे व्यवहार में लागू करने के लिए सक्षम बनाना जरूरी है। डॉ. रंजय कुमार सिंह ने कहा कि इस तरह का प्रशिक्षण वैज्ञानिकों और विषय-वस्तु विशेषज्ञों को न्यायसंगत, समावेशी और किसान-केंद्रित कृषि-खाद्य प्रणाली विकसित करने में मदद करेगा।
महिलाओं के अनुकूल कृषि तकनीकों पर चर्चा
तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान संवादपरक व्याख्यान, तकनीकी सत्र और अनुभव साझा किए गए। प्रतिभागियों को लैंगिक-अनुकूल कृषि अनुसंधान एवं विस्तार, कृषि में महिलाओं के लिए राष्ट्रीय सूचना प्रणाली, जलवायु-अनुकूल एवं पोषण-संवेदनशील कृषि में लैंगिक दृष्टिकोण, महिला-अनुकूल कृषि उपकरण और एर्गोनॉमिक मूल्यांकन जैसे विषयों की जानकारी दी गई।
इसके अलावा कृषि विकास में महिलाओं की भागीदारी, नेतृत्व और निर्णय लेने की भूमिका को मजबूत करने में सामाजिक मान्यताओं और संस्थागत प्रक्रियाओं की भूमिका पर भी चर्चा हुई।
कार्यक्रम का समापन पोस्ट-मूल्यांकन और वैलिडिक्ट्री सत्र के साथ हुआ। इसमें ICAR के सहायक महानिदेशक (कृषि विस्तार) डॉ. रंजय कुमार सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।





