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खरगोन दंगा मामले में 11 आरोपी बरी, माकपा ने फैसले पर सरकार से उठाए सवाल

भोपाल। वर्ष 2022 में रामनवमी के दौरान खरगोन में हुए दंगा मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मुकेश नाथ की अदालत ने 11 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने अपने निर्णय में गवाहों के बयानों में विरोधाभास और पहचान संबंधी साक्ष्यों को पर्याप्त नहीं माना।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि अदालत के फैसले से पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। उनके अनुसार, 11 में से आठ प्रत्यक्षदर्शी गवाह आरोपियों की पहचान नहीं कर सके, जबकि जिन तीन गवाहों ने पहचान की, उनके बयानों में विरोधाभास पाया गया।

माकपा ने दावा किया कि न्यायालय ने अपने फैसले में यह भी उल्लेख किया कि फॉरेंसिक जांच में पेट्रोल बम या हाइड्रो बम के इस्तेमाल का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला। साथ ही पुलिस यह स्पष्ट नहीं कर सकी कि बड़ी भीड़ में से इन आरोपियों की पहचान किस आधार पर की गई।

पार्टी ने आरोप लगाया कि दंगों के बाद अल्पसंख्यक समुदाय के घरों और दुकानों पर कार्रवाई की गई तथा अब आरोपियों के बरी होने के बाद उन्हें हुए नुकसान की भरपाई की जानी चाहिए। माकपा ने प्रभावित लोगों को मुआवजा देने और मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।

दूसरा पक्ष: माकपा के बयान में लगाए गए आरोप संबंधित राजनीतिक दल के हैं। इस संबंध में राज्य सरकार, पुलिस अथवा अन्य संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया इस विज्ञप्ति में शामिल नहीं है। अदालत के विस्तृत आदेश और सरकारी पक्ष के आधार पर ही मामले की अंतिम कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।

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