
भोपाल, 31 जुलाई। मध्य प्रदेश में खरीफ सीजन के बीच किसानों को रासायनिक उर्वरक की कमी का सामना करना पड़ रहा है। सोयाबीन, धान, तिली और अन्य खरीफ फसलों के लिए इस समय खाद की सबसे अधिक जरूरत है, लेकिन कई सहकारी समितियों और वितरण केंद्रों पर यूरिया उपलब्ध नहीं होने से किसान सुबह से शाम तक लाइन में लगने को मजबूर हैं।
मार्कफेड के 29 जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में 28 जुलाई तक 10.95 लाख टन उर्वरक का वितरण किया जा चुका है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 18 हजार टन अधिक है। वहीं कुल उपलब्धता 14.55 लाख टन रही, जो पिछले साल से 1.86 लाख टन ज्यादा है। इसके बावजूद कई जिलों से उर्वरक की कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं।
सरकार का कहना है कि प्रदेश में उर्वरक का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है, लेकिन किसानों का आरोप है कि समितियों और वितरण केंद्रों पर उन्हें समय पर खाद नहीं मिल रही। हाल ही में सरकार ने ई-टोकन व्यवस्था भी स्थगित कर दी है, जिसके बाद वितरण व्यवस्था प्रभावित होने की बात कही जा रही है।
आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष वितरित कुल उर्वरक में 6.22 लाख टन यूरिया शामिल है, जो कुल वितरण का लगभग 57 प्रतिशत है। इसके अलावा 2.61 लाख टन एनपीके, 1.63 लाख टन डीएपी व टीएसपी, 0.38 लाख टन एसएसपी और 0.12 लाख टन पोटाश का वितरण हुआ है। इससे स्पष्ट है कि किसान अभी भी सबसे अधिक यूरिया पर निर्भर हैं, जबकि कृषि विशेषज्ञ संतुलित उर्वरक उपयोग की सलाह देते हैं।
प्रमुख आंकड़े
कुल उपलब्धता (2026): 14.55 लाख टन (पिछले वर्ष से 1.86 लाख टन अधिक)
कुल वितरण: 10.95 लाख टन (18 हजार टन अधिक)
मौजूदा स्टॉक: 3.60 लाख टन
सबसे अधिक वितरण: यूरिया – 6.22 लाख टन
खरीफ सीजन की अनुमानित आवश्यकता: 8.92 लाख टन
कुल मिलाकर, सरकारी आंकड़े पर्याप्त उपलब्धता और स्टॉक का संकेत देते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कई किसानों को समय पर उर्वरक नहीं मिलने से खेती प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। किसानों का कहना है कि वितरण व्यवस्था में सुधार और समितियों पर नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना जरूरी है।




