नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई पर रहवासियों ने उठाए
भोपाल। आवासीय क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। अरेरा कॉलोनी के रहवासियों और मामले से जुड़े याचिकाकर्ता ने नगर निगम की कार्रवाई पर पक्षपातपूर्ण होने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि छोटे कारोबारियों के प्रतिष्ठानों पर सीलिंग की जा रही है, जबकि बड़े और रसूखदार व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई नहीं हो रही है।
रहवासियों ने आरोप लगाया कि अरेरा कॉलोनी में अवैध रूप से संचालित मॉल, शोरूम और पब पर कार्रवाई नहीं की गई। उनका यह भी दावा है कि मंदिर के सामने संचालित शराब दुकान भी यथावत है, जबकि नमकीन का कारोबार करने वाले छोटे व्यापारी के प्रतिष्ठान को सील कर दिया गया।
‘हमारी शिकायतों पर कब होगी कार्रवाई?’
सीलिंग कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद कुछ रहवासियों ने नगर निगम की टीम से अपनी शिकायतों पर कार्रवाई को लेकर सवाल किए। उनका कहना था कि यदि आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को हटाने के निर्देश हैं तो सभी प्रतिष्ठानों पर एक समान कार्रवाई होनी चाहिए।
रहवासियों का आरोप है कि कुछ स्थानों पर सीलिंग और अन्य जगहों पर केवल नोटिस देकर कार्रवाई की खानापूर्ति की जा रही है। उन्होंने निगम से पूछा कि लंबे समय से की जा रही उनकी शिकायतों पर कार्रवाई कब होगी।
सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका की चेतावनी
मामले में याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि नियम सभी के लिए समान होने चाहिए। यदि कार्रवाई में भेदभाव जारी रहा तो वे सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर करने पर विचार करेंगे।
रहवासियों ने आरोप लगाया कि नगर निगम द्वारा सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत की गई कार्रवाई संबंधी रिपोर्ट और जमीनी स्थिति में अंतर है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अवैध निर्माण से यातायात और पार्किंग की समस्या का दावा
विवेक त्रिपाठी ने कहा कि अरेरा कॉलोनी में नियम विरुद्ध निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों के कारण रहवासियों को परेशानी हो रही है। उनके अनुसार कई इमारतों में पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने से सड़कों और गलियों में वाहनों का दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अवैध निर्माणों के कारण फुटपाथ तक प्रभावित हुए हैं।
उन्होंने बताया कि आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ रहवासियों ने टॉर्च मार्च, कैंडल मार्च और बारिश के दौरान पैदल मार्च सहित विभिन्न माध्यमों से विरोध दर्ज कराया है।
मंदिर के सामने शराब दुकान को लेकर भी आपत्ति
रहवासी लवनीश भाटी ने कहा कि कॉलोनी की समस्याओं को लेकर लंबे समय से जिला प्रशासन से शिकायत की जा रही है। उनका आरोप है कि जिम्मेदार विभागों की उदासीनता के कारण आवासीय क्षेत्र में कई तरह की व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ी हैं। उन्होंने मंदिर के सामने संचालित शराब दुकान को लेकर भी आपत्ति जताई और कार्रवाई की मांग की।
कई रहवासी समितियां अभियान में शामिल
संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति के नेतृत्व में चल रहे अभियान को शहर की कई आवासीय समितियों का समर्थन मिलने का दावा किया गया है। इनमें गौतम नगर, कोलार रोड, नेहरू नगर, त्रिलंगा, रोहित नगर, रचना नगर, बावड़िया, साकेत नगर, भेल, कोटरा, लालघाटी, शक्तिनगर और शाहपुरा सहित अन्य क्षेत्र शामिल हैं।
समिति से जुड़े लोगों के अनुसार आगे की रणनीति तैयार की जा रही है। रहवासियों की मांग है कि आवासीय क्षेत्रों में निर्माणाधीन नियम विरुद्ध भवनों की भी तत्काल जांच की जाए और जहां आवश्यक हो, निर्माण पर रोक लगाई जाए। साथ ही जिन अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में नियम विरुद्ध निर्माण हुए हैं, उनकी जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाए।
निगम के पक्ष का इंतजार
रहवासियों के आरोपों के बीच नगर निगम का आधिकारिक पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण है। निगम की ओर से यह स्पष्ट किया जाना बाकी है कि अरेरा कॉलोनी और अन्य आवासीय क्षेत्रों में कार्रवाई के लिए क्या समान मानदंड तय किए गए हैं और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के संबंध में क्या कार्रवाई की जा रही है। निगम का पक्ष सामने आने के बाद ही कार्रवाई की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
