छोटे तालाब में गंदा पानी और पेड़ों को नुकसान, एनजीटी सख्त चार सप्ताह में देनी होगी कार्रवाई की रिपोर्ट

अवैध निर्माण और सीवेज रोकने के लिए उठाए गए कदमों का मांगा हिसाब
नालों का गंदा पानी रोकने पर मांगा जवाब
भोपाल। शहर के छोटे तालाब में गंदे पानी के बहाव, कथित अवैध निर्माण और पेड़ों को नुकसान पहुंचाने के मामलों में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। अधिकरण की भोपाल पीठ ने संबंधित विभागों को चार सप्ताह के भीतर कार्रवाई और अनुपालन की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। 15 अक्टूबर को राशिद नूर खान विरुद्ध कलेक्टर भोपाल एवं अन्य मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध या अनधिकृत निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती। सुनवाई में नगर निगम ने संबंधित निर्माण कार्यों को पुरानी संरचनाओं की मरम्मत बताया, लेकिन अधिकरण ने वेटलैंड संरक्षण एवं प्रबंधन नियम, 2017 का कड़ाई से पालन करने पर जोर दिया।
गंदा पानी रोकने का काम जारी, अब देनी होगी प्रगति की जानकारी
नगर निगम ने सुनवाई के दौरान बताया कि अमृत 2.0 योजना के तहत नालों के पानी को तालाब में जाने से रोकने और उसका रास्ता बदलने का काम चल रहा है। इस पर अधिकरण ने नगर निगम और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को निर्देश दिए कि बिना उपचारित गंदे पानी का बहाव रोकने के लिए की गई कार्रवाई और नालों के पानी को दूसरी ओर मोड़ने के काम की प्रगति रिपोर्ट चार सप्ताह में प्रस्तुत करें।
पेड़ों को नुकसान पहुंचाने पर भी मांगा हिसाब
छोटे तालाब के आसपास पेड़ों को कथित तौर पर जहरीले रसायनों से नुकसान पहुंचाने और उनके सूखने के मामले में वन विभाग, नगर निगम तथा वृक्ष अधिकारी से भी जवाब मांगा गया है। कार्रवाई प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किए जाने पर पीठ ने नाराजगी जताई और पेड़ों को हुए नुकसान, वृक्ष कटाई की अनुमति तथा प्रतिपूरक पौधारोपण के संबंध में जानकारी देने के निर्देश दिए। न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने पर्यावरणीय नियमों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया। मामले की अगली सुनवाई 21 दिसंबर 2026 को होगी।

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