
भोपाल ।।देश में बढ़ती ऑनलाइन ठगी, मिलावटी सामान, फर्जी ऑफर, खराब सेवाओं और बाजार अनियमितताओं के बीच अब उपभोक्ता अधिकार राजनीति का भी महत्वपूर्ण मुद्दा बनने लगा है। इसी पृष्ठभूमि में मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपभोक्ता संरक्षण प्रकोष्ठ ने प्रदेशभर में उपभोक्ता जागरूकता अभियान चलाने की घोषणा की है।
भोपाल स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित बैठक में पार्टी नेताओं ने उपभोक्ता अधिकारों को गांव-गांव तक पहुंचाने, हेल्पलाइन चलाने और सूचना के अधिकार (RTI) जैसे कानूनी माध्यमों के उपयोग पर जोर दिया।
क्यों महत्वपूर्ण बन रहा है उपभोक्ता अधिकार का मुद्दा?
भारत में तेजी से बढ़ते डिजिटल बाजार और ई-कॉमर्स विस्तार के साथ उपभोक्ता शिकायतों की प्रकृति भी बदल रही है। अब शिकायतें केवल राशन, बिजली या मिलावट तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि:
ऑनलाइन फ्रॉड,
फर्जी निवेश योजनाएं,
डिजिटल पेमेंट विवाद,
घटिया निर्माण,
मेडिकल बिलिंग,
और नकली उत्पाद
जैसे मुद्दे तेजी से बढ़ रहे हैं।
उपभोक्ता मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि आम नागरिकों को अभी भी अपने कानूनी अधिकारों, शिकायत तंत्र और मुआवजा प्रक्रियाओं की पर्याप्त जानकारी नहीं है। यही कारण है कि राजनीतिक दल अब इसे जनसंपर्क और जनआंदोलन दोनों के रूप में देखने लगे हैं।
कांग्रेस ने क्या कहा?
बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. राजेंद्र सिंह ने कहा कि बाजार में बढ़ती अनियमितताओं के खिलाफ जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। उनके अनुसार आम नागरिक अक्सर जानकारी के अभाव में ठगी और शोषण का शिकार हो जाते हैं।
वहीं डॉ. महेन्द्र सिंह चौहान ने कहा कि उपभोक्ता अधिकारों की जानकारी अभी भी समाज के बड़े वर्ग तक नहीं पहुंच पाई है। उन्होंने सूचना के अधिकार कानून को भ्रष्टाचार और उपभोक्ता अन्याय के खिलाफ प्रभावी माध्यम बताया।
हरिशंकर शुक्ल ने प्रदेशभर में उपभोक्ता हेल्पलाइन, नुक्कड़ सभाएं और प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने की घोषणा की। उनके अनुसार संगठन का उद्देश्य केवल राजनीतिक गतिविधि नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर उपभोक्ताओं को शिकायत और समाधान प्रणाली से जोड़ना है।
राजनीतिक रणनीति या सामाजिक आवश्यकता?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उपभोक्ता अधिकार का मुद्दा अब शहरी मध्यमवर्ग, ग्रामीण उपभोक्ताओं और डिजिटल उपयोगकर्ताओं—तीनों को जोड़ता है। ऐसे में यह विषय केवल सामाजिक अभियान नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी प्रभावशाली बन सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार:
महंगाई,
सेवा गुणवत्ता,
डिजिटल ठगी,
और निजी कंपनियों की जवाबदेही
आने वाले वर्षों में बड़े जनमुद्दे बन सकते हैं।
भारतीय मानक ब्यूरो की भूमिका भी चर्चा में
बैठक के दौरान भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा गुणवत्ता और उपभोक्ता अधिकारों पर विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया। विशेषज्ञ मानते हैं कि नकली और घटिया उत्पादों के बढ़ते बाजार में BIS प्रमाणन और गुणवत्ता जागरूकता की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
आगे क्या असर दिख सकता है?
यदि यह अभियान केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा और वास्तव में हेल्पलाइन, कानूनी सहायता तथा स्थानीय शिकायत निवारण तक पहुंचा, तो यह उपभोक्ता जागरूकता को जमीनी स्तर पर मजबूत कर सकता है।
हालांकि चुनौतियां भी कम नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कानूनी प्रक्रियाओं की जटिलता, लंबी उपभोक्ता अदालत प्रक्रिया और डिजिटल साक्षरता की कमी अब भी बड़ी बाधाएं बनी हुई हैं।
भोपाल में हुई यह बैठक संकेत देती है कि मध्यप्रदेश में उपभोक्ता अधिकार अब केवल कानूनी विषय नहीं रह गया है, बल्कि सामाजिक जागरूकता, राजनीतिक विमर्श और नागरिक अधिकारों की व्यापक बहस का हिस्सा बनता जा रहा है।



