आज बाजार में छोटे व्यापारियों के बीच भय का माहौल बनाया जा रहा है कि दुकान बंद हुई तो वे बेरोजगार हो जाएंगे, उनके लोन हैं, बैंक गारंटी है, परिवार का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।
लेकिन सवाल यह है कि इस पूरे माहौल का सबसे ज्यादा फायदा किसे हो रहा है?
क्या बड़े व्यापारी छोटे व्यापारियों को आगे करके अपनी राजनीति नहीं कर रहे?
क्या छोटे व्यापारी भावनाओं और डर के आधार पर आंदोलन का चेहरा बन रहे हैं, जबकि बड़े हित कहीं और सुरक्षित रखे जा रहे हैं?
हम छोटे व्यापारी के खिलाफ नहीं हैं। रोजगार बचना चाहिए, व्यापार भी चलना चाहिए। लेकिन कानून और व्यवस्था का बोझ केवल आम जनता और छोटे लोगों पर डालकर, बड़े लोगों को बचाने की राजनीति भी स्वीकार नहीं होनी चाहिए।
आज एक तरफ बाजार में कहा जा रहा है कि “छोटे व्यापारी बेरोजगार हो जाएंगे”, लेकिन आम जनता के सामने पूरी तस्वीर कुछ और तरीके से रखी जा रही है।
भोपाल के लिए मास्टर प्लान और मिक्स्ड यूज़ की चर्चा लगातार चल रही है। सार्वजनिक रूप से भी यह बहस सामने आई है कि व्यापारियों और रहवासियों—दोनों पक्षों को सुनकर समाधान निकाला जाए।
लेकिन हमारा स्पष्ट सवाल है—
अगर गुजरात मॉडल की बात होगी, तो क्या मध्य प्रदेश में भी उसी मॉडल की सभी शर्तों और व्यवस्थाओं पर खुलकर चर्चा होगी?ड्राई स्टेट घोषित होगा?
आधा मॉडल नहीं चलेगा!
जो भी मॉडल लागू हो, वह पूरी पारदर्शिता, कानून, रहवासियों की सुरक्षा, पार्किंग, ट्रैफिक, फायर सेफ्टी और मूलभूत सुविधाओं को ध्यान में रखकर लागू होना चाहिए।
हमें विकास चाहिए,
व्यापार भी चाहिए,
लेकिन रहवासियों की शांति और सुरक्षा की कीमत पर नहीं।
और अगर जन्माष्टमी के आसपास भोपाल के लिए कोई नया मास्टर प्लान, मिक्स्ड यूज़ नीति या नया मॉडल लाने की चर्चा है, तो सरकार को अफवाहों के बजाय जनता के सामने स्पष्ट और आधिकारिक जानकारी रखनी चाहिए।
छोटे व्यापारी को डराकर नहीं…
बड़े व्यापारी को बचाकर नहीं…
बल्कि सबके लिए समान और न्यायपूर्ण कानून बनाकर शहर चलना चाहिए।
न्याय सबके लिए — कानून सबके लिए — और विकास भी सबके लिए!
सयुक्त रहवासी संघर्ष समिति
