अहमदाबाद स्थित Entrepreneurship Development Institute of India (ईडीआईआई) के 25वें दीक्षांत समारोह में इस वर्ष उद्यमिता, नवाचार और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा केंद्र में रही। संस्थान ने विभिन्न प्रबंधन एवं उद्यमिता कार्यक्रमों के 98 विद्यार्थियों और शोधार्थियों को डिप्लोमा एवं प्रमाणपत्र प्रदान किए। समारोह में नीति निर्माताओं, बैंकिंग क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों और उद्योग जगत से जुड़े विशेषज्ञों ने युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला उद्यमी बनने का संदेश दिया।
उद्यमिता शिक्षा के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में उभरता ईडीआईआई
भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय द्वारा “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” के रूप में मान्यता प्राप्त Entrepreneurship Development Institute of India पिछले चार दशकों से उद्यमिता विकास और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। संस्थान का 25वां दीक्षांत समारोह उसके अहमदाबाद परिसर में आयोजित हुआ, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में Vinai Kumar Saxena शामिल हुए।
समारोह में Rakesh Sharma, Dr. Sunil Shukla और बैंकिंग, उद्योग एवं स्किल डेवलपमेंट क्षेत्र के कई वरिष्ठ प्रतिनिधि मौजूद रहे।
98 विद्यार्थियों को मिली डिग्री और उद्यमिता प्रशिक्षण
इस वर्ष के दीक्षांत समारोह में विभिन्न कार्यक्रमों के तहत कुल 98 विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। इनमें—
पीजीडीएम-एंटरप्रेन्योरशिप (PGDM-E) के 76 विद्यार्थी
पीजीडीएम-इनोवेशन एंटरप्रेन्योरशिप एंड वेंचर डेवलपमेंट (PGDM-IEV) के 8 विद्यार्थी
पीजीडीएम-ऑनलाइन के 11 विद्यार्थी
फेलो प्रोग्राम इन मैनेजमेंट (FPM) के 3 शोधार्थी
शामिल रहे।
संस्थान के अनुसार, कई विद्यार्थियों ने अपने स्टार्टअप मॉडल, बिजनेस प्लान और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर निवेश एवं अनुदान स्वीकृतियां भी हासिल की हैं।
प्लास्टिक रीसाइक्लिंग से एआई प्लेटफॉर्म तक, नए स्टार्टअप आइडियाज पर काम
दीक्षांत समारोह की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि छात्रों द्वारा विकसित किए गए स्टार्टअप आइडियाज केवल पारंपरिक व्यापार तक सीमित नहीं रहे। विद्यार्थियों ने—
प्लास्टिक वेस्ट रीसाइक्लिंग प्लांट
एआई आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म
बाल मानसिक स्वास्थ्य समाधान
लैंडस्केपिंग एवं हॉर्टिकल्चर टेक्नोलॉजी
पेट हेल्थ टेक इकोसिस्टम
बायोडिग्रेडेबल पेपर बोतल निर्माण
जैसे उभरते क्षेत्रों में परियोजनाएं विकसित की हैं।
यह संकेत देता है कि भारत की नई उद्यमी पीढ़ी अब पर्यावरण, स्वास्थ्य और तकनीक आधारित समस्याओं के समाधान पर अधिक फोकस कर रही है।
“सीखना कभी समाप्त नहीं होता” : विनय कुमार सक्सेना
समारोह को संबोधित करते हुए Vinai Kumar Saxena ने कहा कि डिग्री प्राप्त करना शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि वास्तविक सीखने की शुरुआत है। उन्होंने विद्यार्थियों से आजीवन सीखने की मानसिकता अपनाने और नैतिक मूल्यों के साथ उद्यमिता करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में जिज्ञासा, नवाचार और लगातार सीखते रहने की क्षमता ही युवाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेगी।
“अनिश्चितता के दौर में अनुकूलन क्षमता जरूरी”
Rakesh Sharma ने अपने संबोधन में कहा कि आज की दुनिया अस्थिरता, अनिश्चितता और जटिलताओं से भरी हुई है। ऐसे समय में अनुकूलन क्षमता उद्यमियों के लिए सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुकी है।
उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि सच्चा उद्यमी चुनौतियों से घबराता नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों को अवसर में बदलना सीखता है।
भारत में बढ़ रही है स्टार्टअप संस्कृति
Dr. Sunil Shukla ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत में उद्यमिता को लेकर सोच तेजी से बदली है। अब युवा सरकारी नौकरी या पारंपरिक करियर विकल्पों के बजाय स्टार्टअप और नवाचार आधारित उद्यमों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय स्टार्टअप नीति, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्किल डेवलपमेंट मिशन और निवेश इकोसिस्टम के विस्तार ने देश में उद्यमिता को नई गति दी है। ऐसे संस्थान युवाओं को केवल अकादमिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि जोखिम प्रबंधन, नेतृत्व और व्यवसायिक रणनीति की व्यावहारिक समझ भी प्रदान कर रहे हैं।
ईडीआईआई के 25वें दीक्षांत समारोह में स्टार्टअप और नवाचार पर जोर, छात्रों को ‘जॉब सीकर नहीं, जॉब क्रिएटर’ बनने का संदेश
