भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार लंबे समय तक माइलेज, कीमत और सर्विस नेटवर्क के इर्द-गिर्द घूमता रहा। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। प्रीमियम और मिड-सेगमेंट कार खरीदारों के बीच “ड्राइविंग एक्सपीरियंस”, हाई-स्पीड स्टेबिलिटी, ब्रेकिंग कंट्रोल और सेफ्टी जैसे पैरामीटर तेजी से महत्वपूर्ण बनते जा रहे हैं। इसी बदलते ट्रेंड के बीच [Skoda Auto India](https://www.skoda-auto.co.in/?utm_source=chatgpt.com) ने अपना नया ब्रांड अभियान “G.O.A.T – Greatest On A Track” लॉन्च किया है, जो केवल एक मार्केटिंग टैगलाइन नहीं बल्कि भारतीय बाजार में अपनी परफॉर्मेंस-ओरिएंटेड पहचान को मजबूत करने की रणनीति माना जा रहा है।
‘Greatest of All Time’ से ‘Greatest On A Track’ तक का सफर
दुनिया भर में G.O.A.T शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर किसी क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी या ब्रांड के लिए किया जाता है। स्कोडा ने इसे नए तरीके से परिभाषित करते हुए “Greatest On A Track” में बदला है। कंपनी का उद्देश्य स्पष्ट है—वह खुद को सिर्फ फैमिली कार निर्माता नहीं, बल्कि “ड्राइवर-केंद्रित इंजीनियरिंग ब्रांड” के रूप में स्थापित करना चाहती है।
यह अभियान ऐसे समय में आया है जब भारतीय उपभोक्ताओं के बीच टर्बो-पेट्रोल इंजन, DSG ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन और यूरोपीय ड्राइविंग डायनेमिक्स को लेकर रुचि बढ़ रही है। खासकर युवा खरीदार अब केवल फीचर-लोडेड कार नहीं बल्कि “एंगेजिंग ड्राइव” भी चाहते हैं।
रिकॉर्ड बनाकर शुरू हुआ अभियान
स्कोडा ऑटो इंडिया ने इस अभियान की शुरुआत एक मोटरस्पोर्ट-स्टाइल रिकॉर्ड से की। कंपनी ने कोयंबटूर स्थित CoASTT (Coimbatore Automotive Sports and Technical Training) ट्रैक पर “एक ही निर्माता की कारों द्वारा सबसे तेज मल्टी-कार रिले” का रिकॉर्ड दर्ज कराया। यह उपलब्धि इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की निगरानी में हासिल की गई।
पांच अलग-अलग स्कोडा कारों ने रिले फॉर्मेट में ट्रैक पूरा किया और पिट-लेन बदलावों सहित कुल 12 मिनट 30.97 सेकंड का समय दर्ज किया। इस फ्लीट में शामिल मॉडल थे:
Skoda Kylaq
Skoda Kushaq
Skoda Slavia
Skoda Octavia RS
Skoda Kodiaq
यह रिकॉर्ड केवल गति का प्रदर्शन नहीं था। इसमें लगातार ड्राइविंग, ब्रेकिंग स्थिरता, इंजन विश्वसनीयता और टीम सिंक्रोनाइजेशन जैसे तकनीकी पहलुओं की भी परीक्षा हुई।
क्यों महत्वपूर्ण है यह अभियान?
1. भारतीय बाजार में “ड्राइविंग डायनेमिक्स” की नई लड़ाई
अब तक भारतीय बाजार में Hyundai, Maruti Suzuki और Tata Motors जैसे ब्रांड मुख्य रूप से फीचर्स, माइलेज और वैल्यू फॉर मनी पर फोकस करते रहे हैं। वहीं स्कोडा, Volkswagen और कुछ हद तक Honda ने ड्राइविंग क्वालिटी को अपनी पहचान बनाया।
स्कोडा का यह अभियान इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में “ड्राइविंग फील” भी एक बड़ा बिक्री कारक बनने जा रहा है।
2. SUV युग में भी सेडान और परफॉर्मेंस इंजीनियरिंग पर जोर
भारतीय बाजार तेजी से SUV-प्रधान बन चुका है। इसके बावजूद स्कोडा अपनी सेडान विरासत—विशेषकर Slavia और Octavia RS—को परफॉर्मेंस पहचान के साथ जोड़कर जीवित रखना चाहती है। यह रणनीति उन ग्राहकों को लक्षित करती है जो अभी भी हाई-स्पीड कंट्रोल और लो-सेट ड्राइविंग पोजिशन को प्राथमिकता देते हैं।
3. RS बैज की वापसी से उत्साही ग्राहकों को संदेश
स्कोडा वैश्विक स्तर पर अपने RS (Rally Sport) मॉडल्स के लिए जानी जाती है। भारत में Octavia RS का एक मजबूत फैन बेस रहा है। कंपनी द्वारा RS विरासत पर दोबारा जोर देना संकेत देता है कि भविष्य में भारत में और अधिक परफॉर्मेंस मॉडल्स या स्पोर्टी वेरिएंट देखने को मिल सकते हैं।
स्कोडा के लिए यह रणनीति क्यों जरूरी हो गई है?
भारत में स्कोडा ने पिछले कुछ वर्षों में MQB-A0-IN प्लेटफॉर्म आधारित कारों के जरिए अपनी स्थिति मजबूत की है। Volkswagen Group की लोकलाइजेशन रणनीति के तहत विकसित इस प्लेटफॉर्म ने स्कोडा को प्रतिस्पर्धी कीमत पर यूरोपीय इंजीनियरिंग उपलब्ध कराने में मदद की।
हालांकि कंपनी अभी भी वॉल्यूम के मामले में बड़े भारतीय ब्रांड्स से पीछे है। ऐसे में स्कोडा “मास मार्केट” बनने की बजाय “प्रेमियम ड्राइविंग ब्रांड” की छवि पर काम कर रही है—ठीक वैसे ही जैसे कुछ टेक कंपनियां कम वॉल्यूम लेकिन मजबूत ब्रांड वैल्यू पर फोकस करती हैं।
भारतीय ग्राहकों के लिए इसका क्या मतलब है?
इस अभियान का सीधा असर भविष्य की उत्पाद रणनीतियों पर पड़ सकता है:
ज्यादा शक्तिशाली टर्बो इंजन विकल्प
स्पोर्टी डिजाइन और RS ट्रिम्स
बेहतर सस्पेंशन ट्यूनिंग
ट्रैक-फोकस्ड ब्रांड इवेंट्स
ड्राइविंग कम्युनिटी और मोटरस्पोर्ट कल्चर को बढ़ावा
यदि यह रणनीति सफल होती है तो अन्य कंपनियां भी “ड्राइवर एंगेजमेंट” को लेकर आक्रामक अभियान शुरू कर सकती हैं।
सिर्फ मार्केटिंग नहीं, ब्रांड पोजिशनिंग का बदलाव
ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों के अनुसार, यह अभियान केवल विज्ञापन नहीं बल्कि “ब्रांड पर्सेप्शन रीबूट” का हिस्सा है। स्कोडा यह बताने की कोशिश कर रही है कि उसकी कारें केवल फीचर-समृद्ध नहीं बल्कि इंजीनियरिंग-ड्रिवन मशीनें हैं।
स्कोडा ऑटो इंडिया के ब्रांड डायरेक्टर आशिष गुप्ता ने भी अभियान के दौरान “स्टीयरिंग प्रिसीजन”, “चेसिस बैलेंस” और “ड्राइवर-मशीन कनेक्शन” जैसे शब्दों पर जोर दिया। यह संकेत देता है कि कंपनी अब भावनात्मक ड्राइविंग अनुभव को अपनी मुख्य पहचान बनाना चाहती है।
आगे क्या?
भारतीय ऑटो सेक्टर तेजी से इलेक्ट्रिफिकेशन और ADAS तकनीक की ओर बढ़ रहा है। ऐसे समय में स्कोडा का “परफॉर्मेंस DNA” पर जोर दिलचस्प है। आने वाले वर्षों में यदि कंपनी अपनी इलेक्ट्रिक गाड़ियों में भी यही ड्राइविंग कैरेक्टर बनाए रखती है, तो वह प्रीमियम EV सेगमेंट में अलग पहचान बना सकती है।
संभव है कि भविष्य में भारत में ट्रैक-डे इवेंट्स, RS लाइनअप और मोटरस्पोर्ट-प्रेरित प्रोडक्ट रणनीति को और आक्रामक तरीके से आगे बढ़ाया जाए। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि स्कोडा भारतीय ग्राहकों को यह संदेश देना चाहती है—कार सिर्फ एक ट्रांसपोर्ट मशीन नहीं, बल्कि एक “ड्राइविंग अनुभव” भी हो सकती है।
Skoda Auto India का नया ‘G.O.A.T’ अभियान: क्या भारतीय कार बाजार अब सिर्फ माइलेज नहीं, ड्राइविंग परफॉर्मेंस से भी तय होगा?
