दो रूसी जहाज जब्त, क्रू पर केस की तैयारी: क्या ट्रंप की आक्रामक नीति दुनिया को युद्ध की ओर धकेल रही है?

वैश्विक राजनीति एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है। अमेरिका द्वारा वेनेजुएला जा रहे रूसी तेल टैंकरों की जब्ती और उनके क्रू पर आपराधिक मुकदमा चलाने की तैयारी ने रूस-अमेरिका तनाव को और भड़का दिया है। इस पूरे घटनाक्रम को रूस ने सीधी चुनौती बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक और टकरावपूर्ण नीति कहीं दुनिया को एक बार फिर वैश्विक युद्ध की आग में न झोंक दे।

क्या है पूरा मामला

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका ने वेनेजुएला जा रहे रूसी तेल टैंकर ‘मैरिनेरा’ को जब्त कर लिया है। इसके साथ ही जहाज के क्रू पर आपराधिक मुकदमा चलाने की तैयारी की जा रही है। अमेरिका का आरोप है कि यह जहाज अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा था। हालांकि रूस ने इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया है और इसे अमेरिका की उकसावे वाली नीति करार दिया है।

रूस की तीखी प्रतिक्रिया

रूसी विदेश मंत्रालय ने इस मामले पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा है कि अमेरिकी कार्रवाई न केवल अवैध है, बल्कि इससे नौसैनिक टकराव का खतरा भी बढ़ गया है। रूस ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि जहाज के क्रू के मानवीय अधिकारों की रक्षा की जाए और उन्हें किसी भी तरह का उत्पीड़न न झेलना पड़े। रूस का कहना है कि अमेरिका जानबूझकर हालात को तनावपूर्ण बना रहा है ताकि वैश्विक शक्ति संतुलन को अपने पक्ष में मोड़ा जा सके।

पूर्व NSA जनरल की चेतावनी

इस मुद्दे पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जनरल माइक फ्लिन ने भी गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि रूस को लगातार उकसाना बेहद खतरनाक हो सकता है, क्योंकि रूस एक परमाणु शक्ति संपन्न देश है। फ्लिन के मुताबिक ऐसी कार्रवाइयां गलती से भी बड़े सैन्य संघर्ष में बदल सकती हैं, जिसके परिणाम पूरी दुनिया को भुगतने पड़ सकते हैं।

चीन का रूस को समर्थन, बढ़ता वैश्विक तनाव

स्थिति को और जटिल बना रहा है चीन का रूस के प्रति झुकाव। चीन पहले ही कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रूस का समर्थन करता नजर आ चुका है। ऐसे में अमेरिका बनाम रूस-चीन ध्रुवीकरण दुनिया को एक नए शीत युद्ध से आगे बढ़ाकर खुले संघर्ष की ओर ले जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समुद्र में किसी भी स्तर पर सैन्य टकराव हुआ, तो हालात तेजी से नियंत्रण से बाहर जा सकते हैं।

क्या तीसरे विश्व युद्ध की आहट?

ट्रंप की आक्रामक विदेश नीति, रूस को लगातार उकसाने की रणनीति, चीन का समर्थन और नौसैनिक तनाव, ये सभी संकेत दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की दहलीज पर खड़ा करते दिखाई दे रहे हैं। अब सवाल यह है कि क्या वैश्विक नेता समय रहते संयम और कूटनीति का रास्ता अपनाएंगे, या फिर विश्व नेता बनने की सनक एक बार फिर मानवता को युद्ध की त्रासदी में धकेल देगी?

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