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फकीरी” ऐसी ही होनी चाहिए: सत्ता छोड़ सादगी चुनने वाले मार्क रूटे की मिसाल

नेदरलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री की जीवनशैली बनी प्रेरणा

दुनिया की राजनीति में जहां सत्ता, वैभव और विशेषाधिकार आम बात माने जाते हैं, वहीं नेदरलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री मार्क रूटे की सादगी एक अलग ही मिसाल पेश करती है। करीब 14 वर्षों तक देश के प्रधानमंत्री रहने के बावजूद उनके नाम न तो भ्रष्टाचार जुड़ा, न किसी घोटाले की चर्चा हुई।

मार्क रूटे अपनी सादगी भरी जीवनशैली के लिए पहले से ही जाने जाते रहे हैं। प्रधानमंत्री पद छोड़ने के बाद भी उन्होंने न कोई शोर किया, न किसी तरह का प्रदर्शन। कहा जाता है कि उन्होंने सत्ता सौंपी, अपनी साइकिल का ताला खोला और आम नागरिक की तरह घर लौट गए। न कैमरों की चिंता, न वीआईपी संस्कृति का मोह।

सादगी को जीवन में उतारने की सोच

मार्क रूटे हमेशा यह कहते रहे हैं कि सत्ता सेवा का माध्यम है, विशेषाधिकार नहीं। इसी सोच के कारण वे राजनीति के साथ-साथ शिक्षा और सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहने की इच्छा भी जताते रहे हैं। उनकी यह सोच उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाती है।

प्रेरणा बनती ‘फकीरी’

यह कहानी केवल राजनीति की नहीं, बल्कि मूल्यों और चरित्र की है। सच्ची सादगी वही होती है, जिसे दिखाया नहीं जाता, बल्कि जिया जाता है।
जो लोग फकीरी मिज़ाज रखते हैं, वे सचमुच ठोकर में भी ताज संभाल कर रखते हैं।

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