प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को पत्र लिखा पत्र
भोपाल। मध्य प्रदेश कर्मचारी मंच ने भारत के प्रधानमंत्री एवं म प्र के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांग करी है कि सांसद और विधायकों के वेतन निर्धारण के लिए वेतन आयोग का गठन किया जाए। मध्य प्रदेश कर्मचारी मंच के प्रदेश अध्यक्ष अशोक पांडे ने बताया है कि सांसद एवं विधायकों के लिए भी नौकरशाही के तर्ज पर वेतन आयोग का गठन किया जाए क्योंकि सांसद विधायक भी समय-समय पर वेतन भत्ते बढ़ाने की मांग करते हैं सांसद विधायक स्वयं ही सदन में प्रस्ताव पारित करके अपने वेतन भत्ते बड़ा लेते हैं जिससे सरकार की भी आलोचना होती है विडंबना यह है कि आजादी के 78 वर्ष बाद भी राज्य और केंद्र सरकार सांसद विधायकों के वेतन भत्ते निर्धारण करने लिए कोई स्पष्ट वेतन निर्धारण नीति नहीं बन पाई है सरकार ने नौकरशाह एवं कर्मचारियों के लिए आठवें वेतन आयोग का गठन किया है उसी तर्ज पर सांसद विधायकों के लिए भी आयोग का गठन कर देश और प्रदेश को एक न्याय संगत संदेश सरकार को देना चाहिए वर्तमान में जहां पूर्व सांसदों की पेंशन 31000 है वही मध्य प्रदेश में पूर्व विधायकों की पेंशन 35000 रुपए है जिसे अब बढ़ाकर 75000 करने का प्रस्ताव है भारत एकमात्र ऐसा राज्य है जहां सांसद विधायक एवं जज जस्टिस अपने वेतन भत्ते स्वयं बढ़ा लेते हैं यह भारत की लचर संवैधानिक व्यवस्था का प्रमाण है भारत सरकार ने 2023 में सांसदों के वेतन भत्ते निर्धारित करने के लिए एक समय सीमा नियम बनाये है उसी प्रकार मध्य प्रदेश सरकार को भी विधायकों एवं पूर्व विधायकों के वेतन भत्ते निर्धारित करने के लिए समय सीमा की एक नीति या नियम बनना चाहिए।