भोपाल/पीथमपुर, । मध्यप्रदेश के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में यूनियन कार्बाइड के परिसंकटमय रासायनिक अवशिष्ट (hazardous waste) को भस्मक संयंत्र में वैज्ञानिक विधि से जलाए जाने के बाद जो राख उत्पन्न हुई, उसमें कैंसर कारक पेस्टीसाइड एवं इनसेक्टीसाइड नहीं पाए गए हैं। इसके साथ ही, हेवी मेटल्स की मात्रा भी बेहद सीमित दर्ज की गई है। यह जानकारी मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) के जनसंपर्क अधिकारी श्री मनोज कुमार मंडरई ने दी।
भोपाल गैस त्रासदी से जुड़ा था यह रासायनिक कचरा
गौरतलब है कि 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के बाद यूनियन कार्बाइड के परिसर में जमा यह रासायनिक कचरा दशकों से पर्यावरणविदों और आम जनता के लिए चिंता का विषय बना हुआ था। इस कचरे का सुरक्षित निपटान एक चुनौती थी, जिसे अब पीथमपुर स्थित भस्मक संयंत्र में वैज्ञानिक प्रक्रिया द्वारा निष्पादित किया गया।
राख सुरक्षित, भूमिगत जल पर नहीं होगा असर
श्री मंडरई ने बताया कि वेस्ट जलाने के बाद प्राप्त राख को लेकर विस्तृत रासायनिक परीक्षण किए गए, जिनमें स्पष्ट हुआ कि इसमें ऐसा कोई रसायन नहीं है जिससे कैंसर या भूमिगत जल प्रदूषण का खतरा हो। उन्होंने आश्वस्त किया कि:
राख से भूमिगत जल की गुणवत्ता प्रभावित नहीं होगी।
किसी भी प्रकार का रसायनिक रिसाव (leaching) नहीं होगा।
भविष्य में भी पर्यावरण को इससे कोई खतरा नहीं है।
30 वर्षों तक की जाएगी निगरानी
पर्यावरणीय सुरक्षा की दृष्टि से इस पूरे क्षेत्र की 30 वर्षों तक वैज्ञानिक मॉनीटरिंग की जाएगी। इसमें जल, मिट्टी और वायुमंडलीय गुणवत्ता की नियमित जांच सुनिश्चित की जाएगी ताकि किसी भी संभावित प्रभाव को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।
पर्यावरण विशेषज्ञों और शासन की बड़ी उपलब्धि
यह निष्कर्ष राज्य शासन, पर्यावरण विभाग एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त प्रयासों की एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। इससे न केवल पर्यावरण के प्रति नागरिकों की आशंका दूर हुई है, बल्कि भविष्य में इस तरह के रासायनिक अपशिष्ट के सुरक्षित निपटान की दिशा में भरोसेमंद मॉडल भी स्थापित हुआ है।
यूनियन कार्बाइड के कचरे में नहीं मिले कैंसर कारक रसायन, पीथमपुर में नष्ट सामग्री की राख सुरक्षित घोषित
