भोपाल, 6 जून 2026। सड़क सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और तकनीक आधारित पुलिसिंग के बढ़ते महत्व के बीच मध्य प्रदेश पुलिस अकादमी में तीन माह का परिवहन उप निरीक्षक बुनियादी प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस प्रशिक्षण में 21 प्रशिक्षु अधिकारियों ने भाग लिया, जिन्हें आधुनिक पुलिस व्यवस्था, नए आपराधिक कानूनों, यातायात नियंत्रण और जनसेवा आधारित पुलिसिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
समापन समारोह मध्य प्रदेश पुलिस अकादमी में आयोजित किया गया, जिसमें विशेष पुलिस महानिदेशक (प्रशासन) आदर्श कटियार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे अधिकारियों को ईमानदारी, अनुशासन, संवेदनशीलता और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कार्य करने का संदेश दिया।
बदलती पुलिसिंग की जरूरतों के अनुरूप तैयार किए गए अधिकारी
आज के दौर में यातायात प्रबंधन केवल चालान और नियमों के पालन तक सीमित नहीं रह गया है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण, वाहनों की संख्या में वृद्धि और स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम के विस्तार ने परिवहन अधिकारियों की भूमिका को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए 9 मार्च से 5 जून 2026 तक संचालित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में अधिकारियों को सड़क सुरक्षा, ट्रैफिक कानून, वाहन प्रबंधन, दुर्घटना नियंत्रण और नागरिकों के साथ व्यवहारिक संवाद जैसे विषयों पर प्रशिक्षित किया गया।
नए आपराधिक कानूनों से लेकर मोटरयान अधिनियम तक का अध्ययन
प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को हाल के वर्षों में लागू हुए आपराधिक कानूनों, मोटरयान अधिनियम, पुलिस नियमों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। इसके साथ ही नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की योग्यता, तनाव प्रबंधन, धैर्य और व्यावसायिक दक्षता पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी रूप से प्रशिक्षित और कानूनों की अद्यतन जानकारी रखने वाले अधिकारी सड़क सुरक्षा अभियानों को अधिक प्रभावी बना सकते हैं।
फील्ड ट्रेनिंग पर रहा विशेष जोर
सैद्धांतिक प्रशिक्षण के साथ-साथ अधिकारियों को व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया। इसमें आर्म्स ट्रेनिंग, परेड, रायट ड्रिल, शारीरिक प्रशिक्षण, योग और फील्ड ऑपरेशन शामिल रहे।
प्रशिक्षुओं को वास्तविक परिस्थितियों में कार्य करने की समझ विकसित करने के लिए विभिन्न संस्थानों का शैक्षणिक भ्रमण भी कराया गया। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र, मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय, डायल 112, स्मार्ट सिटी कंट्रोल सेंटर और पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली की कार्यप्रणाली को नजदीक से समझा।
जनोन्मुखी पुलिसिंग पर विशेष फोकस
प्रशिक्षण कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य अधिकारियों में जनसरोकार आधारित पुलिसिंग की भावना विकसित करना भी रहा। उन्हें यह समझाया गया कि यातायात व्यवस्था केवल कानून लागू करने का विषय नहीं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा और सुविधा से जुड़ा दायित्व है।
प्रशिक्षण के दौरान टीम वर्क, समन्वय, नेतृत्व क्षमता और सार्वजनिक संवाद कौशल को विकसित करने के लिए विशेष सत्र आयोजित किए गए।
उत्कृष्ट प्रशिक्षुओं को किया गया सम्मानित
समापन समारोह में बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षु अधिकारियों को ट्रॉफी और प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी आकर्षण का केंद्र बनाया, जहां परिवहन उप निरीक्षक और उप पुलिस अधीक्षक प्रशिक्षणार्थियों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
इस अवसर पर मध्य प्रदेश पुलिस अकादमी के उप निदेशक संजय कुमार अग्रवाल, सहायक निदेशक रश्मि पाण्डेय, यास्मीन जहरा तथा ज्योति उमठ सहित अकादमी के वरिष्ठ अधिकारी, प्रशिक्षक और कर्मचारी उपस्थित रहे।
सड़क सुरक्षा और सुशासन में निभाएंगे अहम भूमिका
विशेषज्ञों के अनुसार प्रशिक्षित परिवहन उप निरीक्षकों की यह नई खेप प्रदेश में यातायात व्यवस्था को अधिक वैज्ञानिक, तकनीक-संचालित और नागरिक हितैषी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। सड़क दुर्घटनाओं में कमी, ट्रैफिक अनुशासन को बढ़ावा देने और स्मार्ट ट्रांसपोर्ट प्रबंधन की दिशा में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम भविष्य की पुलिसिंग के लिए अहम माने जा रहे हैं।
मध्य प्रदेश पुलिस अकादमी से निकले 21 नए परिवहन उप निरीक्षक, आधुनिक यातायात प्रबंधन और पुलिसिंग का प्रशिक्षण हुआ पूरा
