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लियासोत में FTL के करीब पक्का निर्माण, डेयरी और तालाब के भीतर सड़क मिली; केरवा में FTL नहीं होने से सर्वे रुका
भोपाल। बड़े तालाब और आसपास के जलस्रोतों की सीमा तथा फुल टैंक लेवल (FTL) की वास्तविक स्थिति पता करने के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की विशेष टीम ने बुधवार को केरवा-कलियासोत क्षेत्र में ग्राउंड ट्रुथिंग की। सर्वे के दौरान FTL के बेहद करीब पक्का निर्माण और डेयरी, जलभराव क्षेत्र से जुड़ी सड़क, रेस्टोरेंट और अन्य निर्माण सामने आए। कई स्थानों पर प्लॉटिंग के लिए मुनारें लगाए जाने और प्राकृतिक जल प्रवाह प्रभावित होने की स्थिति भी देखी गई। हालांकि, केरवा डैम पहुंचने के बाद FTL पर पानी नहीं होने के कारण वहां सर्वे आगे नहीं बढ़ सका।
मोटल शिराज से शुरू हुआ सर्वे
संयुक्त टीम ने सुबह करीब 11 बजे वाल्मी के सामने स्थित मोटल शिराज की संपत्ति से सर्वे शुरू किया। टीम ने निचले हिस्से में बनी मुनारों की स्थिति देखी और मौके पर मौजूद पानी के स्तर का जायजा लिया। इसके बाद राजेश वाधवानी की संपत्ति के आसपास पहुंचकर पानी के पीछे मौजूद मुनारों और उनके FTL से संबंध की स्थिति देखी गई।
FTL से 10 फीट दूर मिला निर्माण
सर्वे के दौरान फिश फार्म क्षेत्र में FTL से महज 10 फीट की दूरी पर पक्का निर्माण मिला। इसके पास ही डेयरी संचालित होती हुई मिली। मौके पर टीम ने निर्माण और आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण किया। स्थानीय स्तर पर इस संपत्ति को पूर्व DGP से संबंधित बताया गया है। इसकी वास्तविक स्थिति और वैधता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
खुदागंज में FTL तक पहुंचा पानी
टीम वार्ड 26 के ग्राम खुदागंज भी पहुंची। यहां कई स्थानों पर पानी FTL की सीमा तक पहुंचा हुआ दिखाई दिया। इस क्षेत्र में कई रेस्टोरेंट और अन्य निर्माण जलस्तर के काफी करीब मिले। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने FTL सीमा बताने वाले पत्थरों की स्थिति और लोकेशन भी जांची, ताकि जलभराव क्षेत्र की सीमा तय करने में भ्रम न रहे।
कलियासोत में सड़क और प्लॉटिंग पर सवाल
कलियासोत तालाब क्षेत्र में सर्वे के दौरान जलभराव क्षेत्र से होकर सड़क बनाए जाने का मामला सामने आया। इसके अलावा तालाब की सीमा के भीतर या उसके बेहद करीब कई बड़े रेस्टोरेंट और व्यावसायिक निर्माण मिले। कुछ जगहों पर प्लॉटिंग के लिए मुनारें लगाए जाने की बात भी सामने आई। इससे प्राकृतिक पानी के बहाव और जलभराव क्षेत्र में बदलाव को लेकर सवाल उठे हैं।
केरवा में FTL नहीं, सर्वे पर लगा ब्रेक
इसके बाद टीम केरवा पहुंची, लेकिन यहां अधिकारियों ने बताया कि डैम में फिलहाल FTL तक पानी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में जलभराव क्षेत्र की वास्तविक सीमा का मौके पर आकलन करना मुश्किल है। इसी कारण केरवा में ग्राउंड ट्रुथिंग रोक दी गई।
याचिकाकर्ता राशिद नूर खान ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि केरवा डैम की पानी रोकने वाली बाउंड्री वॉल टूटी हुई है। उनका कहना है कि यदि पानी का बहाव रोककर FTL हासिल किया जाता तो जलभराव क्षेत्र और उसके अंदर मौजूद निर्माणों की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती थी। यह उनका आरोप है, जिसकी पुष्टि संबंधित विभागों की रिपोर्ट से होगी।
15 सितंबर को NGT में पेश होगी रिपोर्ट
केरवा की स्थिति पर टीम और अधिकारियों के बीच चर्चा के बाद तय किया गया कि जल्दबाजी में आगे की कार्रवाई नहीं की जाएगी। डैम के जलस्तर, FTL और तकनीकी स्थिति से जुड़ी रिपोर्ट 15 सितंबर को NGT के सामने पेश होगी। इसके बाद न्यायाधिकरण के निर्देशों के आधार पर केरवा में दोबारा सर्वे और निर्माणों की जांच की दिशा तय होगी।
याचिकाकर्ता ने निष्पक्ष जांच की मांग की
राशिद नूर खान ने कहा कि जलस्रोत की सीमा केवल कागजों पर तय करने के बजाय मौके की वास्तविक स्थिति, पुरानी मुनारों, जलस्तर और प्राकृतिक जल प्रवाह को वैज्ञानिक तरीके से रिकॉर्ड किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि इससे किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति या भू-माफिया को तकनीकी या कानूनी प्रक्रिया का लाभ लेने से रोका जा सकेगा और जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ेगी।
