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इंदौर: दूषित पेयजल आपूर्ति से मौतों का मामला, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के खिलाफ यूथ कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शन

इंदौर। मध्य प्रदेश के औद्योगिक और व्यावसायिक शहर इंदौर में दूषित पेयजल आपूर्ति के कारण हुई मौतों का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस गंभीर जनस्वास्थ्य संकट को लेकर अब राजनीतिक विरोध भी तेज हो गया है। शुक्रवार को यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के खिलाफ लोअर लेक (यशवंत सागर) के किनारे विरोध प्रदर्शन किया और राज्य सरकार व नगर प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए।

यूथ कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इंदौर में जल प्रदाय व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। कई इलाकों में लोगों को दूषित और गंदा पानी पीने को मजबूर होना पड़ा, जिसके चलते मासूम बच्चों सहित कई लोगों की जान चली गई। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि बार-बार शिकायतों के बावजूद न तो जल की गुणवत्ता की नियमित जांच की गई और न ही समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था की गई।

“यह प्रशासनिक विफलता नहीं, अपराध है” – यूथ कांग्रेस

प्रदर्शन के दौरान यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए कहा कि यह सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि आम नागरिकों की जान के साथ किया गया अपराध है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों पर एफआईआर दर्ज हो तथा मृतकों के परिजनों को पर्याप्त मुआवजा दिया जाए।

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पर सीधा आरोप

यूथ कांग्रेस ने सीधे तौर पर संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि इंदौर की जनता ने उन्हें जनप्रतिनिधि चुना है, लेकिन जनता की बुनियादी जरूरत स्वच्छ पेयजल की सुरक्षा में वे असफल रहे हैं। कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया कि जब नगर निगम और जल प्रदाय व्यवस्था मंत्री के प्रभाव क्षेत्र में आती है, तो जिम्मेदारी से बचा कैसे जा सकता है?

स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम पर भी सवाल

प्रदर्शन में यह मुद्दा भी उठाया गया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय-समय पर पानी के सैंपल लिए जाने और जांच की जो औपचारिकताएं बताई जाती हैं, वे कागजों तक ही सीमित हैं। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई होती, तो यह त्रासदी टाली जा सकती थी।

आगे और तेज होगा आंदोलन

यूथ कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पेयजल जैसे जीवन-मरण के मुद्दे पर राजनीति नहीं, जवाबदेही तय होनी चाहिए।

इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों का यह मामला अब सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि प्रदेश की शासन-प्रशासन व्यवस्था पर बड़ा सवाल बनकर उभर रहा है।

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