भोपाल। एमपी वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉरपोरेशन से सेवा निवृत्त हुए कर्मचारियों की पेंशन योजना में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के माध्यम से चलाई गई इस पेंशन योजना में शामिल 35 कर्मचारियों की मृत्यु के बाद उनकी विधवा पत्नियों को पिछले 12 वर्षों से कोई पेंशन या आर्थिक सहायता प्राप्त नहीं हुई है।
वरिष्ठ कर्मचारी नेता अनिल बाजपेई ने जानकारी दी कि संबंधित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए अब तक 20 से अधिक बार प्रबंधन को पत्र लिखे जा चुके हैं, लेकिन एमपी वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन और एलआईसी के बीच चल रहे विवाद के चलते विधवा महिलाओं को कोई राहत नहीं मिली है।
पेंशन योजना में 32% राशि काटी, लेकिन वापसी नहीं
अनिल बाजपेई ने बताया कि सेवा निवृत्ति के समय कर्मचारियों की 32% राशि कॉरपोरेशन द्वारा रोक ली गई, जिसे एलआईसी के पेंशन फंड में निवेश किया गया था। कर्मचारियों का दावा है कि यह राशि कर्मचारियों के खाते में जमा होनी चाहिए थी या फिर मृत कर्मचारियों के परिवार को लौटाई जानी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि एमपी वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन ने पेंशन योजना की नियुक्ति अनुसूचियों और योगदान विवरण एलआईसी को उपलब्ध तो कराया, लेकिन पॉलिसी नियमों के अनुसार दावा भुगतान की कोई प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।
मुख्यमंत्री को पत्र, तत्काल सहायता की मांग
वरिष्ठ कर्मचारी नेता अनिल बाजपेई ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर यह मांग की है कि 12 वर्षों से पेंशन से वंचित विधवा महिलाओं को एलआईसी से तत्काल भुगतान दिलाने की कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि यह केवल आर्थिक मुद्दा नहीं बल्कि मानवाधिकार और सामाजिक न्याय का विषय भी है।
पीएफ और पेंशन फंड में पारदर्शिता की कमी
अनिल बाजपेई ने यह भी बताया कि एमपी वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन में कार्यरत सभी कर्मचारियों की पीएफ राशि नियोक्ता के माध्यम से जमा होती है, और उस पर नियमानुसार पेंशन योगदान भी शामिल होता है। लेकिन LIC और कॉरपोरेशन के आपसी समन्वय की कमी के कारण न तो पेंशन की राशि लौटाई गई और न ही पेंशन शुरू की गई।
एमपी वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के 35 दिवंगत कर्मचारियों की विधवाओं को 12 साल से नहीं मिली पेंशन, एलआईसी और कॉरपोरेशन के बीच विवाद unresolved
