बांदा (उत्तर प्रदेश), बबेरू तहसील।
बबेरू क्षेत्र में एक सदियों पुराना ब्राह्मण परिवार का मकान, बिना किसी पूर्व सूचना या विधिक प्रक्रिया के, प्रशासन द्वारा ढहा दिया गया। जिस तरह से यह कार्यवाही की गई, वह किसी आतंकवादी के ठिकाने को गिराने जैसी प्रतीत होती है, न कि एक सम्मानजनक नागरिक के घर की।
लगातार बारिश और बेघर परिवार
घटना ऐसे समय में हुई जब क्षेत्र में लगातार बारिश हो रही है। इस घर में छोटे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग रहते थे, जो अब खुले आसमान के नीचे, भीगते हुए जीवन बिताने को मजबूर हैं। प्रशासन ने न तो कोई वैकल्पिक व्यवस्था की और न ही पीड़ित परिवार से बात की।
क्या यही है योगी सरकार का “सभी को आवास” का सपना?
जहां एक ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ देश के हर नागरिक को छत दिलाने की दिशा में काम कर रहे हैं — वहीं कुछ स्थानीय अधिकारियों और रसूखदार नेताओं की मनमानी से गरीब और सज्जन परिवारों को उजाड़ा जा रहा है।
जांच हो — और दोषियों पर कार्रवाई भी
यह न सिर्फ प्रशासनिक मनमानी का मामला है, बल्कि जातीय संतुलन, सामाजिक न्याय और मानवीय गरिमा से भी जुड़ा हुआ है। बिना नोटिस और अदालत की स्पष्ट अनुमति के कोई भी मकान गिराया जाना अवैध है और संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है, जो प्रत्येक नागरिक को जीवन और सम्मान से जीने का अधिकार देता है
हम मांग करते हैं:
1. घटना की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
2. पीड़ित परिवार को मुआवजा और वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जाए।
3. जिम्मेदार अधिकारियों और नेताओं पर कड़ी कार्रवाई हो।
4. आगे से बिना नोटिस ऐसी कोई कार्यवाही न हो, इसकी व्यवस्था की जाए।
यह सिर्फ एक घर नहीं था — यह उनकी विरासत, पहचान और अस्तित्व था। ऐसे कृत्य पर चुप रहना भी अपराध है। मैं इस घटना की कड़ी निंदा करती हूं और सभी सामाजिक संगठनों व जागरूक नागरिकों से अपील करती हूं कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए आवाज़ उठाएं।