
कानपुर । उत्तर प्रदेश के कानपुर से सामने आए कुछ वायरल वीडियो ने समाज, परवरिश और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूनसान सड़क, देर रात का वक्त और कैमरे के सामने खुलेआम गाली-गलौज, मारपीट और हंगामा—इन दृश्यों ने न सिर्फ स्थानीय लोगों को चौंकाया है, बल्कि यह सोचने पर मजबूर किया है कि क्या अराजकता को अब “नॉर्मल” बनाने की कोशिश की जा रही है?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ युवक-युवतियां कानपुर की सड़कों पर देर रात खुलेआम अशोभनीय भाषा का प्रयोग करते हुए झगड़ा और मारपीट कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि पूरी घटना को मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड किया जा रहा है, मानो कानून और समाज की मर्यादा का कोई भय ही न हो। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ऐसे वीडियो शहर की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं और युवाओं में गलत संदेश दे रहे हैं।
इस घटनाक्रम ने परवरिश की भूमिका पर भी बहस छेड़ दी है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब परिवार के सदस्य ऐसे दृश्य देखेंगे, तो उन्हें कैसा महसूस होगा? क्या माता-पिता की जिम्मेदारी केवल शिक्षा तक सीमित है, या संस्कार देना भी उतना ही जरूरी है? समाज के वरिष्ठ लोगों का मानना है कि स्वतंत्रता के नाम पर अनुशासनहीनता को बढ़ावा देना खतरनाक है।
पुलिस प्रशासन का कहना है कि वायरल वीडियो की जांच की जा रही है और पहचान होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, सार्वजनिक स्थानों पर मारपीट, गाली-गलौज और शांति भंग करना दंडनीय अपराध है, चाहे वह कैमरे के सामने ही क्यों न किया गया हो।
कानपुर की यह घटना केवल एक वीडियो तक सीमित नहीं, बल्कि यह सामाजिक सोच और युवाओं की दिशा पर प्रश्नचिह्न है। आज़ादी का अर्थ अराजकता नहीं होता। कानून का डर, समाज की मर्यादा और जिम्मेदार नागरिक व्यवहार—यही किसी स्वस्थ समाज की पहचान है।





