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भोपाल नगर निगम में गौवंश हत्या को लेकर हंगामा: विपक्ष का वाकआउट, 12 कर्मचारियों पर निलंबन कार्रवाई

भोपाल,  भोपाल नगर निगम परिषद के मंगलवार को आयोजित साधारण सम्मेलन में गौवंश हत्या का मामला सत्ताधारी और विपक्ष के बीच गर्मागर्म बहस का केंद्र बन गया। बैठक शुरू होने से पहले ही नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी, प्रवीण सक्सेना, गुड्डू चौहान, शिरीन सहित सभी विपक्षी पार्षद धरने पर बैठ गए। उन्होंने “गौवंश के हत्यारों को फांसी दो” और “गौमाता हम शर्मिंदा है, तेरे हत्यारे जिंदा हैं” जैसे नारे लगाकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।

धरने के दौरान भाजपा के पार्षद देवेंद्र भार्गव भी शामिल हुए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो वह पार्षद पद से इस्तीफा दे देंगे। इसके बाद परिषद अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने नगर निगम के स्लाटर हाउस में पदस्थ 12 कर्मचारियों सहित पशु चिकित्सक पर निलंबन कार्रवाई करने के निर्देश निगमायुक्त संस्कृति जैन को दिए। निलंबन आदेश के बाद देवेंद्र भार्गव का इस्तीफा अस्वीकार कर दिया गया।

विपक्ष ने किया वाकआउट

धरने और नारेबाजी के बीच विपक्ष ने कहा कि स्लाटर हाउस का मुद्दा पहले भी उठ चुका था, फिर भी अनुमति क्यों दी गई। वे एमआईसी आर.के. बघेल के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे और अंततः एजेंडे पर चर्चा से पहले सदन का वाकआउट कर दिया।

महापौर का स्पष्ट संदेश

नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने कहा कि शहर में गौकशी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो आरोपी गौमांस की हत्या और तस्करी में जेल में बंद हैं, उनके खिलाफ पहले भी कार्रवाई की जा चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्लाटर हाउस को स्थाई रूप से बंद किया जाएगा और राजधानी को मांस की मंडी नहीं बनने दिया जाएगा।

नेता प्रतिपक्ष और एमआईसी की भूमिका

नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने सदन में सवाल उठाया कि हाईकोर्ट में पहले से लगी रोक के बावजूद स्लाटर हाउस के लिए नोटशीट क्यों वापस ली गई। कांग्रेस पार्षद प्रवीण सक्सेना ने महापौर और एमआईसी पर भी कार्यवाही की मांग की, सवाल उठाते हुए कि बाहर बैठकर टेंडर मंजूरी कैसे दी गई।

विकास संबंधी एजेंडे पास

विपक्ष के वाकआउट के बाद परिषद ने जलप्रदाय, सीवेज, वाटर रेज़्युवनेशन और विवाह पंजीयन शुल्क से संबंधित एजेंडे पास कर दिए।

विवाह पंजीयन शुल्क में बदलाव: 30 दिन की समय सीमा के लिए शुल्क 1100 रुपए से घटाकर 130 रुपए, विलंब शुल्क 60 दिन के बाद सिर्फ 1100 रुपए।

प्राइवेट कालोनियों के लिए स्थाई नल कनेक्शन: शहर की 829 निजी कालोनियों को स्थाई जल कनेक्शन प्रदान करने की मंजूरी।

ग्रीन म्यूनिसिपल बॉन्ड: अमृत 2 परियोजना के तहत जलप्रदाय, सीवेज और तालाबों के जीर्णोद्धार के लिए 200 करोड़ रुपये जुटाने की मंजूरी।


निष्कर्ष

नगर निगम परिषद में गौवंश हत्या का मामला न केवल राजनीतिक हंगामे का कारण बना, बल्कि प्रशासनिक कार्रवाई की गति भी तेज हुई। दोषियों के खिलाफ 12 कर्मचारियों की निलंबन कार्रवाई से संदेश स्पष्ट हुआ कि राजधानी भोपाल में गौकशी और पशु क्रूरता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही, शहर के विकास और जलप्रदाय, सीवेज सुधार, तथा सामाजिक कल्याण के एजेंडे भी पारित किए गए, जिससे जनता को लाभ सुनिश्चित होगा।

भोपाल नगर निगम की यह कार्रवाई प्रशासनिक जवाबदेही और कानून के शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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