State

भोपाल में कुक्कुट विकास निगम के संविदा कर्मचारियों का अनोखा प्रदर्शन: 16वें दिन आंखों पर काली पट्टी बांधकर जताया विरोध

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कुक्कुट विकास निगम के संविदा कर्मचारियों का आंदोलन अब उग्र रूप लेता जा रहा है। संविदा नीति 2023 के तहत वेतन और भत्ते दिए जाने की मांग को लेकर चल रहे इस विरोध प्रदर्शन का आज 16वां दिन है। कर्मचारियों ने शुक्रवार को आंखों पर काली पट्टी बांधकर “कुक्कुट विकास निगम प्रबंधन की आंखों की अंधेरगर्दी” के खिलाफ शांतिपूर्ण लेकिन संदेशप्रद प्रदर्शन किया।

काली पट्टी के पीछे की कहानी: ‘प्रबंधन बन चुका है अंधा’

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने आंखों पर काली पट्टी इसलिए बांधी क्योंकि निगम प्रबंधन संवेदनशीलता खो चुका है और कर्मचारियों की जायज़ मांगों को ‘अनदेखा’ कर रहा है। जबकि 22 जुलाई 2023 को संविदा नीति को निगम संचालक मंडल की बैठक में स्वीकृति भी मिल चुकी है।

फिर भी वल्लभ भवन में फाइलें बार-बार मार्गदर्शन के लिए भेजी जा रही हैं, जिससे आदेश जारी नहीं हो पा रहे हैं। कर्मचारी पिछले 16 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे हैं, लेकिन सरकार और विभागीय अधिकारी अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं ले पाए हैं।

संविदा अधिकारी कर्मचारी महासंघ ने साधा निशाना

संघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने बताया कि कुक्कुट विकास निगम के कर्मचारी पहले भी कई बार अनोखे तरीके से आंदोलन कर चुके हैं – कभी चारा खाकर, तो कभी मौन रहकर। अब आंखों पर काली पट्टी बांधकर “व्यवस्था की अंधी नीतियों” के खिलाफ संघर्ष जारी है।

वेतन और भत्तों को लेकर क्या है मामला?

22 जुलाई 2023 को जारी संविदा नीति के अनुसार कर्मचारियों को वेतन और भत्ते दिए जाने थे।

जनवरी 2025 में शासन की ओर से 7 दिन में आदेश जारी करने का आश्वासन मिला था।

लेकिन अब तीन महीने बीत चुके हैं और आदेश जारी नहीं हुए हैं।

सामान्य प्रशासन विभाग की मंजूरी पहले ही प्राप्त है, फिर भी पशुपालन विभाग ‘फॉर्मल मार्गदर्शन’ मांग रहा है।


राठौर ने कहा – “एक बार नीति बन जाए तो उसे लागू करना बाध्यकारी होता है। फिर मार्गदर्शन लेने का कोई तुक नहीं बनता।”

मुख्य मांगें:

1. 22 जुलाई 2023 की संविदा नीति के तहत वेतन और भत्तों का तत्काल भुगतान।


2. निगम संचालक मंडल की मंजूरी के बावजूद आदेशों में देरी पर प्रबंधन की जवाबदेही तय हो।


3. शासन द्वारा दिए गए आश्वासन के बावजूद आदेश लंबित रहने पर कर्मचारियों की नाराज़गी।


4. नीति की वैधता पर सवाल उठाना अनावश्यक है क्योंकि सामान्य प्रशासन विभाग पहले ही अनुमति दे चुका है।



प्रदर्शनकारी कर्मचारी:

इस आंदोलन में अंकित पाठक, अक्षय राजपूत, प्रणय सक्सेना, प्रदेश नंदनवार, आस्था यादव, दीपक शर्मा, संजय सैनी, वैशाली पटेल, सावित्री और कन्हैयालाल जैसे कर्मचारी प्रमुख रूप से शामिल रहे।

संघ की चेतावनी: आंदोलन होगा और उग्र

संघ के अध्यक्ष रमेश राठौर ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि “यदि शीघ्र आदेश जारी नहीं हुए तो यह आंदोलन और तेज़ होगा। इसकी सम्पूर्ण ज़िम्मेदारी शासन और निगम प्रबंधन की होगी।”

Related Articles