State

ग्वालियर हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील अनिल मिश्रा की गिरफ्तारी पर देशभर में हलचल, जमानत पर रोज़ सुनवाई, आंदोलन की चेतावनी

ग्वालियर । ग्वालियर हाईकोर्ट के प्रसिद्ध वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा की गिरफ्तारी को तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन मामला लगातार राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। हाईकोर्ट ग्वालियर में प्रतिदिन जमानत याचिका पर सुनवाई हो रही है, वहीं इस गिरफ्तारी को लेकर सामान्य वर्ग, सनातनी संगठनों और ब्राह्मण समाज में गहरी नाराज़गी देखने को मिल रही है।

फरियादी पर उठे गंभीर सवाल

इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल उस फरियादी की भूमिका को लेकर खड़ा हो रहा है, जिसने अनिल मिश्रा के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया। आरोप लगाया जा रहा है कि यही फरियादी स्वयं एक अन्य प्रकरण में न्यायालय का वारंटी और फरार आरोपी है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि पुलिस उस फरार आरोपी को अब तक गिरफ्तार नहीं कर पाई, लेकिन वही व्यक्ति फरियादी बनकर थाने पहुंचता है और उसके आवेदन पर तुरंत कार्रवाई करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता की गिरफ्तारी कर ली जाती है। इससे पुलिस की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पुलिस और सरकार की भूमिका पर संदेह

अनिल मिश्रा की गिरफ्तारी को लेकर यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि यह कार्रवाई सरकार और पुलिस के सहयोग से की गई प्रतीत होती है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि कानून सभी के लिए समान है, तो फरार आरोपी को पहले गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया और फिर उसके बाद शिकायत की निष्पक्ष जांच क्यों नहीं हुई। यह मामला अब केवल कानूनी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक बहस का रूप ले चुका है।

राजनीतिक असर और समाज में उबाल

इस गिरफ्तारी के बाद भाजपा के पारंपरिक वोटर वर्ग, विशेषकर ब्राह्मण समाज में असंतोष खुलकर सामने आ रहा है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि अनिल मिश्रा आज नहीं हैं तो कल छूट जाएंगे, लेकिन भाजपा ने अपने मूल वोटरों पर जो खंता चलाया है, उसका राजनीतिक खामियाजा आने वाले समय में भुगतना पड़ेगा। यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा बहुजन राजनीति के सहारे सत्ता में बने रहने की सोच रही है, लेकिन इतिहास और वर्तमान राजनीति इसके विपरीत संकेत देते हैं।


परशुराम सेना की चेतावनी

अनिल मिश्रा की गिरफ्तारी को लेकर परशुराम सेना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजेश दुबे ने सरकार को आंदोलन की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि गिरफ्तारी की निष्पक्ष समीक्षा नहीं हुई और फरियादी की पृष्ठभूमि की जांच नहीं की गई तो यह आंदोलन प्रदेशव्यापी रूप ले सकता है।

Related Articles