नई दिल्ली । वक्फ संपत्ति और अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर जारी बहस के बीच, मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने वक्फ संशोधन बिल 2025 का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि वक्फ अधिनियम का उद्देश्य किसी से अधिकार छीनना नहीं, बल्कि वक्फ संपत्तियों के संरक्षण और प्रबंधन को पारदर्शी और सुनियोजित बनाना है।
वक्फ बिल को लेकर फैलाई जा रही हैं भ्रांतियाँ – रजवी
मौलाना रजवी ने कहा कि कुछ तत्व वक्फ बोर्ड कानून में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर भ्रामक प्रचार कर रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि नया बिल वक्फ संपत्तियों के सही पंजीकरण, अवैध अतिक्रमण से सुरक्षा और वक्फ प्रबंधन में पारदर्शिता लाने के लिए है।
उन्होंने कहा, “यह वक्फ संपत्ति अधिनियम का सुधारात्मक कदम है, जो मुस्लिम समुदाय के हितों की रक्षा करेगा और कानूनी सुरक्षा प्रदान करेगा। यह अधिकारों को छीनने का नहीं, बल्कि उन्हें संविधानिक दायरे में सुरक्षित करने का प्रयास है।”
वक्फ संपत्तियों का डिजिटलीकरण और पारदर्शी रिकॉर्डिंग होगी सुनिश्चित
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने इस बात पर भी बल दिया कि वक्फ बोर्ड के रिकार्ड्स का डिजिटलीकरण, भू-अभिलेखों की पुष्टि, और ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम से धार्मिक स्थलों और वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग पर रोक लगेगी। इससे विवादों में कमी आएगी और सामाजिक सौहार्द बना रहेगा।
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निष्कर्ष: वक्फ संशोधन बिल – पारदर्शिता और संरक्षण की दिशा में कदम
वक्फ संशोधन बिल 2025 न केवल अल्पसंख्यकों की धार्मिक संपत्तियों को कानूनी संरक्षण देने का कार्य करेगा, बल्कि इससे विवादों, भ्रष्टाचार और अनियमितता को रोकने में भी मदद मिलेगी। मौलाना रजवी का यह समर्थन इस बात का संकेत है कि बिल को राजनीतिक नजरिए से नहीं, बल्कि समुदाय के व्यापक हित में देखा जाना चाहिए।
वक्फ बिल 2025 का उद्देश्य अधिकार देना है, छीनना नहीं : मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने किया समर्थन
