
पूर्व राजदूत मंजीत सिंह पुरी बोले पाकिस्तान की तरह भारत किसी की गोदी में नहीं बैठता
भोपाल। भोपाल लिट्रेचर एंड आर्ट फेस्टिवल (BLF) के दूसरे दिन शनिवार को भारत भवन का परिसर साहित्य, कला, विचार और संगीत की ऊर्जा से सराबोर नजर आया। तीन दिवसीय इस ‘नॉलेज के महाकुंभ’ में दिनभर गंभीर वैचारिक सत्रों के बाद शाम को सूफियाना रंगत ने माहौल को आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की। मशहूर गायक राजीव सिंह और उनके समूह की सूफी प्रस्तुति ने श्रोताओं को आत्मिक अनुभूति से भर दिया। इस अवसर पर बीएलएफ के डायरेक्टर राघव चंद्रा और अभिलाष खांडेकर भी उपस्थित रहे।
पाकिस्तान की तरह भारत किसी की गोदी में नहीं बैठता : मंजीत सिंह पुरी
ऑपरेशन सिंदूर एंड पाकिस्तान: द अनटोल्ड स्टोरी सत्र में पूर्व राजदूत मंजीत सिंह पुरी और सैयद अकबरुद्दीन ने भारत-पाक संबंधों, कूटनीति और वैश्विक राजनीति पर बेबाक विचार रखे। सत्र का संचालन पाकिस्तान मामलों की विशेषज्ञ डॉ. शालिनी चावला ने किया। मंजीत सिंह पुरी ने कहा कि पहलगाम हमला भारत के सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने की साजिश थी, जिसमें पाकिस्तान की भूमिका स्पष्ट रही। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने प्रभावी कूटनीति के जरिए वैश्विक मंच पर पाकिस्तान को आतंकवाद का केंद्र साबित किया।
उन्होंने दो टूक कहा कि पाकिस्तान की तरह भारत किसी की गोदी में नहीं बैठता, भारत हमेशा हाई-टेबल पर बैठने वाला देश है। पूर्व राजदूत सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि पाकिस्तान झूठे नैरेटिव, फेक न्यूज और ट्रोल फार्म के जरिए भ्रम फैलाने की कोशिश करता है, जबकि भारत तथ्य और विकास के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत के डिजिटल सेक्टर में 67 बिलियन डॉलर का निवेश इस बदली हुई वैश्विक छवि का प्रमाण है।
शिव: सर्वश्रेष्ठ पति और प्रेमी का प्रतीक
आदिदेव: द फर्स्ट लव स्टोरी ऑफ द यूनिवर्स सत्र में लेखक प्रशांत दीक्षित ने शिव-पार्वती के संबंध को प्रेम, समानता और समर्पण का आदर्श बताया। उन्होंने कहा कि शिव ने पार्वती को अपने आधे स्वरूप में स्थान देकर नारी सम्मान की सर्वोच्च मिसाल पेश की।
उनके अनुसार, आकर्षण संघर्ष में समाप्त हो जाता है, लेकिन प्रेम संघर्ष में और निखरता है।
हिमालय का अजेय शेर: जनरल ज़ोरावर सिंह
इस प्रेरक सत्र में कर्नल अजय रैना और लेफ्टिनेंट कर्नल अंशुमन अग्रहरी ने जनरल ज़ोरावर सिंह के साहस, नेतृत्व और रणनीतिक दृष्टि पर प्रकाश डाला। यह सत्र विशेष रूप से युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत रहा।
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लोकसूत्र: स्वदेशी संस्कृति और अमूर्त विरासत
‘लोकसूत्र: विज़ुअलाइज़िंग द इंटैन्जिबल कल्चरल हेरिटेज’ सत्र में आचार्य सिद्धु और अपूर्वा मिश्रा ने गोंड-बैगा जैसी जनजातीय परंपराओं, भाषा और लोक ज्ञान के महत्व पर चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि स्थानीय संस्कृति समाज को मानवीय और प्रकृति-सम्मत बनाती है।
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AI, पाँचवीं औद्योगिक क्रांति और डिजिटल सुरक्षा
‘द नेक्स्ट न्यू: द फिफ्थ इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन’ सत्र में लेखक प्रांजल शर्मा ने GenAI, डिजिटल सुरक्षा और टेक्नोलॉजी मेगा ट्रेंड्स पर विचार रखे। उन्होंने चेताया कि तकनीक के साथ मानवीय मूल्यों का संतुलन जरूरी है।
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स्थानीय संस्कृति से ही बनता है बेहतर समाज
प्रभात तिवारी ने कहा कि समाज को बेहतर बनाने में स्थानीय संस्कृति और जनजातीय कलाओं की भूमिका अहम है। उन्होंने मध्यप्रदेश के जनजातीय कलाकारों को मिले पद्मश्री सम्मानों का उल्लेख करते हुए संरक्षण की आवश्यकता बताई।
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अभिमन्यु: महाभारत का सबसे करुण नायक
लेखिका अनुजा चंद्रमौली ने अभिमन्यु को महाभारत का सबसे भावनात्मक और प्रेरक पात्र बताया। उन्होंने कहा कि अभिमन्यु नारी सम्मान और संवेदनशीलता का भी प्रतीक है।
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इतिहास, रामायण और वैश्विक दृष्टि
लेखक अश्विन सांघी ने कहा कि रामायण के 100 से अधिक संस्करण विश्वभर में प्रचलित हैं। वहीं आभास मालदहियार ने भारतीय इतिहास और दर्शन को नए दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
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निष्कर्ष
बीएलएफ का दूसरा दिन यह संदेश देकर गया कि साहित्य, संस्कृति, कूटनीति, तकनीक और अध्यात्म—सभी मिलकर समाज को दिशा देते हैं। विचारों और सुरों का यह संगम भोपाल को एक बार फिर बौद्धिक राजधानी के रूप में स्थापित करता नजर आया।




