एम्स भोपाल में यूवाइटिस मीट 2025 का सफल आयोजन: मध्य भारत में पहली बार दुर्लभ नेत्र रोगों पर सुपर स्पेशलिटी सम्मेलन

भोपाल,। एम्स भोपाल (AIIMS Bhopal) ने मध्य भारत में पहली बार नेत्रों में सूजन संबंधी जटिल और दुर्लभ रोग यूवाइटिस (Uveitis) पर आधारित एक उच्चस्तरीय सुपर स्पेशलिटी शैक्षणिक सम्मेलन – यूवाइटिस मीट 2025 का भव्य आयोजन किया। कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) अजय सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस सम्मेलन ने दुर्लभ नेत्र रोगों पर चिकित्सा शिक्षा और उपचार की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की है।
नेत्र रोग विभाग, एम्स भोपाल द्वारा आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में देशभर के प्रतिष्ठित नेत्र संस्थानों से आए 125 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन में यूवाइटिस के निदान, प्रबंधन और उपचार पर विस्तृत चर्चाएं हुईं, जिनमें देश के छह प्रमुख नेत्र विशेषज्ञों ने अपने विषय आधारित व्याख्यान प्रस्तुत किए।
मुख्य वक्ता और संस्थान:
डॉ. पद्ममालिनी महेन्द्रदास, नारायण नेत्रालय, बेंगलुरु
डॉ. पार्थप्रतिम दत्ता मजूमदार, शंकर नेत्रालय, चेन्नई
डॉ. आलोक सेन, सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय, चित्रकूट
डॉ. धैवत शाह, चोइथराम नेत्रालय, इंदौर
डॉ. अनामिका द्विवेदी, एसएस मेडिकल कॉलेज, रीवा
इन विशेषज्ञों ने नेत्रों में सूजन (यूवाइटिस) के नवीनतम क्लिनिकल ट्रेंड्स, इमेजिंग टेक्नोलॉजी, इम्यूनोलॉजिकल एप्रोच, और केस स्टडीज पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
प्रतिस्पर्धात्मक गतिविधियाँ और शैक्षणिक नवाचार:
यूवाइटिस मीट 2025 के आयोजन सचिव डॉ. समेन्द्र कारखुर ने बताया कि सम्मेलन में पीजी छात्रों के लिए केस प्रजेंटेशन प्रतियोगिता एवं ऑडियंस क्विज का भी आयोजन किया गया, जिसमें भोपाल के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों से कुल 15 विद्यार्थियों ने भाग लिया।
एम्स भोपाल की द्वितीय वर्ष की छात्रा डॉ. एस्थर ने केस प्रजेंटेशन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
एम्स भोपाल – नेत्र रोग चिकित्सा में अग्रणी:
डॉ. कारखुर ने बताया कि एम्स भोपाल का नेत्र रोग विभाग यूवाइटिस के उन्नत इलाज के लिए सभी आवश्यक उपकरण और विशेषज्ञता से सुसज्जित है। इस आयोजन को सफल बनाने में डॉ. सरोज गुप्ता, डॉ. प्रीति सिंह, डॉ. विद्या वर्मा का विशेष योगदान रहा।
प्रशासन का दृष्टिकोण:
प्रो. (डॉ.) अजय सिंह ने अपने संबोधन में कहा, “एम्स भोपाल केवल चिकित्सा शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि जनसेवा की प्रतिबद्धता का उदाहरण भी है। यूवाइटिस मीट जैसे आयोजन न केवल शैक्षणिक विकास को बढ़ावा देते हैं, बल्कि आम जनता को भी लाभ पहुंचाते हैं। अब मरीजों को दुर्लभ नेत्र रोगों के इलाज के लिए बड़े शहरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा।”