विश्व धरोहर दिवस 2025 पर विशेष रिपोर्ट: मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों को सुलभ बनाने की दिशा में बड़ा कदम

भोपाल। विश्व धरोहर दिवस 2025 के अवसर पर मध्यप्रदेश अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित और समावेशी बनाने के उद्देश्य से बड़ी पहल कर रहा है। राज्य सरकार और मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा महेश्वर, मांडू, धार और ओरछा जैसे ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों पर ‘एक्सेसिबिलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट’ परियोजना लागू की जा रही है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य इन ऐतिहासिक धरोहरों को दिव्यांगजनों समेत सभी पर्यटकों के लिए सुलभ बनाना है।
दिव्यांगजनों के लिए पर्यटन स्थलों को सुलभ बनाने की पहल
मध्यप्रदेश में ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों को सभी के लिए समावेशी बनाने की दिशा में रैंप, ब्रेल साइन बोर्ड, व्हीलचेयर, सुलभ शौचालय और ऑडियो गाइड्स जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति विभाग श्री शिव शेखर शुक्ला ने जानकारी दी कि यह कार्य भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय से मिलने वाली वित्तीय सहायता से संचालित किया जाएगा।
महत्वपूर्ण स्थलों पर विशेष सुविधाएं
महेश्वर: नर्मदा रिसॉर्ट, राम कुंड, देवी संग्रहालय और कालेश्वर मंदिर जैसे स्थलों को दिव्यांग अनुकूल बनाया जा रहा है।
मांडू: सात कोठरी मंदिर, दिल्ली दरवाजा, जामी मस्जिद, अशरफी महल, नीलकंठ मंदिर और रूपमति पेवेलियन जैसे ऐतिहासिक स्थल शामिल हैं।
धार: बाघ गुफाओं और संग्रहालय में सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
ओरछा: राजा महल, जहांगीर महल, पंचमुखी महादेव मंदिर और राय प्रवीण महल में एक्सेसिबिलिटी कार्य हो रहा है।
यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में मध्यप्रदेश के 18 स्थल
मध्यप्रदेश में अब तक यूनेस्को की स्थायी और टेंटेटिव विश्व धरोहर सूची में कुल 18 स्थल शामिल हैं, जिनमें से खजुराहो, भीमबेटका और सांची स्थायी सूची में हैं। 2025 में प्रदेश के चार नए ऐतिहासिक स्थलों — सम्राट अशोक के शिलालेख, चौंसठ योगिनी मंदिर, गुप्तकालीन मंदिर और बुंदेला काल के किला-महल — को टेंटेटिव सूची में जगह मिली है। यह मध्यप्रदेश के सांस्कृतिक महत्व की वैश्विक मान्यता को दर्शाता है।
प्राचीन इतिहास की जीवंत झलक: मौर्य, गुप्त और बुंदेला काल की विरासत
अशोक शिलालेख: सांची, रूपनाथ, गुज्जरा और पानगुरारिया में पाए गए शिलालेख सम्राट अशोक के नैतिक संदेशों को आज भी जीवंत बनाए हुए हैं।
चौंसठ योगिनी मंदिर: मुरैना, खजुराहो और जबलपुर सहित विभिन्न स्थानों पर स्थित ये मंदिर तांत्रिक परंपरा और अद्वितीय शिल्पकला का प्रतीक हैं।
गुप्तकालीन मंदिर: विदिशा, कटनी, सागर, सतना जैसे क्षेत्रों में स्थित मंदिर भारतीय मंदिर वास्तुकला के स्वर्णिम युग का प्रतीक हैं।
बुंदेला स्थापत्य कला: ओरछा, दतिया और गढ़कुंडार के किले और महल राजपूत-मुगल शैली का बेजोड़ संगम दर्शाते हैं।
मध्यप्रदेश बनेगा ‘समावेशी पर्यटन प्रदेश’
पर्यटन स्थलों को सबके लिए सुलभ और समावेशी बनाना मध्यप्रदेश सरकार का उद्देश्य है। इन पहलों से न केवल पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा मिलेगी। पर्यटन मंत्री श्री धर्मेंद्र सिंह लोधी के नेतृत्व में यह योजना राज्य को “समावेशी पर्यटन प्रदेश” के रूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में अग्रसर है।



