जगन्नाथ प्रसाद चौबे ‘वनमाली’ की 114वीं जयंती पर हुआ आयोजन, साहित्य-कला और संस्कृति पर हुआ संवाद
खंडवा। सुप्रसिद्ध कथाकार, शिक्षाविद् और विचारक जगन्नाथ प्रसाद चौबे ‘वनमाली’ की 114वीं जयंती के अवसर पर वनमाली सृजन केन्द्रों का छठवां राष्ट्रीय सम्मेलन रविवार, 9 अगस्त 2026 को डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय, खंडवा में आयोजित किया गया। सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों में सक्रिय वनमाली सृजन केन्द्रों के अध्यक्ष, संयोजक और रचनाकार शामिल हुए।
मध्यप्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, असम, पश्चिम बंगाल और केरल सहित कई राज्यों से प्रतिनिधियों ने सम्मेलन में भागीदारी की।
साहित्य और संस्कृति के लिए रचनात्मक संवाद
वनमाली सृजन पीठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कवि-कथाकार संतोष चौबे ने कहा कि वर्तमान समय में साहित्यिक और सांस्कृतिक समाज का निर्माण सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्रेम, करुणा और मानवता ही समाज को बेहतर दिशा दे सकती है।
उन्होंने बताया कि वनमाली सृजन पीठ और सृजन केन्द्र देश के छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में युवा तथा वरिष्ठ रचनाकारों को जोड़ने का काम कर रहे हैं। इसका उद्देश्य कला, साहित्य और संस्कृति के लिए निरंतर संवाद का वातावरण तैयार करना है।
कार्यक्रम में डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी, डॉ. रविप्रकाश दुबे, डॉ. अरुण जोशी, मुकेश वर्मा, गोविंद शर्मा और वनमाली सृजन पीठ की राष्ट्रीय संयोजक ज्योति रघुवंशी सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे।
चित्र प्रदर्शनी और वेबसाइट का लोकार्पण
सम्मेलन की शुरुआत वनमाली जी के व्यक्तित्व और कृतित्व तथा वनमाली सृजन केन्द्रों की यात्रा पर आधारित चित्र प्रदर्शनी के उद्घाटन से हुई। इसके बाद मां शारदा और वनमाली जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और पुष्पांजलि अर्पित की गई।
संगीत महाविद्यालय खंडवा के विद्यार्थियों ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। वनमाली जी के जीवन और साहित्यिक योगदान पर आधारित फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। इस अवसर पर वनमाली सृजन पीठ की वेबसाइट का लोकार्पण किया गया।
राष्ट्रीय संयोजक ज्योति रघुवंशी ने सृजन पीठ और देशभर के सृजन केन्द्रों की गतिविधियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। वरिष्ठ साहित्यकार और व्यंग्यकार कैलाश मंडलेकर ने ‘वनमाली जी के गद्य में व्यंग्य की अंतर्धारा’ विषय पर विचार रखे।
पुस्तकों और पत्रिकाओं का विमोचन
सम्मेलन के दौरान ‘कला का आदर्श’, ‘वनमाली कथा’, ‘वनमाली वार्ता’, ‘वनमाली जी : एक कृति व्यक्तित्व’, ‘संपूर्ण कहानियां वनमाली’ और ‘वनमाली की कहानियों से गुजरते हुए’ सहित विभिन्न पुस्तकों और पत्रिकाओं का लोकार्पण किया गया।
उत्कृष्ट सृजन केन्द्रों को सम्मान
सुदूर क्षेत्रों और छोटे शहरों-कस्बों में साहित्य, कला, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले चयनित सृजन केन्द्रों को सम्मानित किया गया।
इस दौरान वनमाली सृजन पीठ भोपाल, वनमाली सृजन केन्द्र देवास और वनमाली सृजन केन्द्र कानपुर को प्रशस्ति पत्र और प्रतीक चिन्ह प्रदान किए गए। सभी सृजन केन्द्रों का परिचय सत्र भी आयोजित हुआ।
पुस्तक संस्कृति और हिंदी को लेकर हुआ संवाद
संगठनात्मक सत्रों में ‘वनमाली सृजन पीठ एवं आईसेक्ट पब्लिकेशन की पुस्तक मित्र योजना’, ‘पुस्तक संस्कृति के विकास में विश्व रंग पुस्तक यात्रा का महत्व’ और ‘विश्व रंग अंतरराष्ट्रीय हिंदी ओलंपियाड : स्वरूप और परिकल्पना’ जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
कविताओं से सजी सावन की शाम
सम्मेलन के अवसर पर आमंत्रित कवियों की काव्य गोष्ठी भी आयोजित की गई। विभिन्न वनमाली सृजन केन्द्रों से आए कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। काव्य गोष्ठी का संचालन गोविंद शर्मा ने किया।
‘स्वाधीनता के गान’ में गूंजा राष्ट्रभक्ति का संदेश
राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान ‘स्वाधीनता के गान’ नाम से विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुति भी हुई। रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय और विश्वरंग फाउंडेशन के संयोजन में तैयार इस प्रस्तुति में देशभक्ति की कविताओं और संगीत के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन की स्मृतियों को सामने रखा गया।
टैगोर नाट्य विद्यालय, भोपाल के विद्यार्थियों ने प्रस्तुति दी। कार्यक्रम के दौरान वंदेमातरम् की प्रस्तुति पर दर्शकों ने तिरंगे लहराए और सभागार भारत माता के जयकारों से गूंज उठा।
प्रस्तुति में भारतेन्दु हरिश्चंद्र, जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, निराला, सुभद्रा कुमारी चौहान, सोहनलाल द्विवेदी, महादेवी वर्मा, रामधारी सिंह दिनकर और माखनलाल चतुर्वेदी सहित हिंदी के प्रमुख कवियों की देशभक्ति से जुड़ी रचनाओं को शामिल किया गया।
34 कवियों की 50 से अधिक रचनाओं का संग्रह
आईसेक्ट पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित ‘स्वाधीनता के गान’ में आधुनिक हिंदी के 34 कवियों की 50 से अधिक देशभक्ति की कविताओं को शामिल किया गया है। पुस्तक का संकलन साहित्यकार श्रीराम परिहार और रामवल्लभ आचार्य ने किया है। संतोष चौबे का परामर्श और विनय उपाध्याय का समन्वय रहा।
कार्यक्रम के अंत में वनमाली सृजन पीठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष चौबे ने समाहार वक्तव्य दिया। आभार राष्ट्रीय संयोजक ज्योति रघुवंशी ने व्यक्त किया।
