State

नर्स का चौंकाने वाला दावा : सिविल हॉस्पिटल में हर महीने 5–7 नाबालिग बच्चियों के गर्भवती होने के केस

ज्यादातर मामले रेप से जुड़े अनिरुद्धाचार्य जी के सामने किया खुलासा

नई दिल्ली/भारत । एक महिला नर्स द्वारा किया गया खुलासा देश के सामाजिक और नैतिक ताने-बाने को झकझोर देने वाला है। धार्मिक कथावाचक अनिरुद्धाचार्य जी के मंच पर इस नर्स ने जो कहा, वह किसी एक अस्पताल या शहर की कहानी नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गंभीर चेतावनी मानी जा रही है।नर्स ने दावा किया कि वह जिस सिविल हॉस्पिटल में कार्यरत हैं, वहां हर महीने 5 से 7 ऐसे केस सामने आते हैं, जिनमें छोटी बच्चियां गर्भवती अवस्था में लाई जाती हैं। उनके अनुसार, इनमें से अधिकांश मामले बलात्कार (रेप) से जुड़े होते हैं।

डॉक्टरों पर मजबूरी का बोझ

नर्स ने भावुक होते हुए बताया कि ऐसे मामलों में डॉक्टर्स की टीम को अनचाहे रूप से भ्रूण हत्या (Medical Termination of Pregnancy) करनी पड़ती है।
यह फैसला न तो आसान होता है और न ही मानवीय रूप से सामान्य, लेकिन बच्ची की उम्र, शारीरिक व मानसिक स्थिति, भविष्य की सुरक्षा, इन सब कारणों से डॉक्टरों को यह कठोर कदम उठाना पड़ता है।

सिर्फ एक अस्पताल की कहानी नहीं

नर्स का कहना था कि यह स्थिति केवल उनके अस्पताल तक सीमित नहीं है। अगर एक सरकारी सिविल हॉस्पिटल में हर महीने इतने मामले आ रहे हैं, तो देशभर के हजारों अस्पतालों में रोज़ क्या हो रहा होगा, इसकी कल्पना करना भी डरावना है। यह बयान देश में नाबालिगों की सुरक्षा, महिला अपराध और यौन हिंसा पर बड़े सवाल खड़े करता है।

आंकड़ों और चुप्पी पर सवाल इस खुलासे के बाद यह प्रश्न भी उठ रहा है कि क्या सरकारी आंकड़े वास्तविक स्थिति को दर्शा रहे हैं? क्या नेशनल मीडिया ऐसे मामलों को पर्याप्त जगह दे रही है? नर्स ने बिना किसी डर के मंच से सच्चाई रखने का साहस दिखाया, जिसे कई लोग व्हिसलब्लोअर जैसी भूमिका मान रहे हैं।

समाज के लिए चेतावनी

यह विषय केवल अपराध या स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि नैतिक पतन, परिवार और समाज की जिम्मेदारी, बच्चियों की सुरक्षा व्यवस्था, से जुड़ा हुआ है। अगर ऐसे मामलों पर समय रहते गंभीर चर्चा, सख्त कार्रवाई और सामाजिक जागरूकता नहीं आई, तो हालात और भयावह हो सकते हैं।

निष्कर्ष

यह खुलासा हमें झकझोरता है और सोचने पर मजबूर करता है कि हम किस दिशा में जा रहे हैं। नाबालिग बच्चियों के साथ हो रहे अपराध केवल कानून से नहीं रुकेंगे—इसके लिए समाज, व्यवस्था और सोच तीनों को बदलना होगा।

> नोट: यह खबर नर्स द्वारा सार्वजनिक मंच पर किए गए दावे पर आधारित है। संबंधित विभागों द्वारा जांच और आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।

Related Articles