
रायगढ़ । छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र में कुछ दिन पहले घटी एक घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई के दौरान खनन माफिया द्वारा एक महिला पुलिसकर्मी के साथ की गई बर्बरता ने कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खेतों में दौड़ा-दौड़ा कर महिला पुलिसकर्मी की वर्दी फाड़ी गई और चप्पलों व लाठियों से बेरहमी से पिटाई की गई। यह मामला आज भी लोगों के मन में आक्रोश और पीड़ा पैदा कर रहा है।
क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, तमनार क्षेत्र में अवैध खनन की सूचना पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची थी। इसी दौरान खनन माफिया से जुड़े लोगों ने महिला पुलिसकर्मी को घेर लिया। आरोप है कि दरिंदों ने खेतों में दौड़ा-दौड़ा कर उसकी वर्दी फाड़ी और चप्पलों व लाठियों से हमला किया। पीड़िता हाथ जोड़कर रोती रही और कहती रही, भाई, मुझे मत मारो, लेकिन हमलावरों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। यह घटना न केवल एक महिला के साथ हिंसा है, बल्कि वर्दी पर हमला कर सीधे तौर पर कानून और प्रशासन को चुनौती देने जैसा कृत्य है।
पुलिस की कार्रवाई और आरोपियों की गिरफ्तारी
घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पहले पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। बाद में दो अन्य आरोपियों को भी पकड़ लिया गया। कुल सात आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की स्वाभाविक और सख्त प्रतिक्रिया सामने आई। आरोपियों का सार्वजनिक रूप से जुलूस निकाला गया और उनसे नारे लगवाए गए “महिला पुलिस ज़िंदाबाद” “बहन, हमें माफ़ करो” यह कदम पुलिस द्वारा समाज को स्पष्ट संदेश देने के तौर पर देखा जा रहा है कि महिला सुरक्षा और वर्दी के सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
कठोर धाराओं और सख्त सजा की मांग
इस मामले में आमजन और सामाजिक संगठनों की मांग है कि आरोपियों पर महिला पर हिंसा, शासकीय कार्य में बाधा, वर्दी फाड़ने, मारपीट और आपराधिक षड्यंत्र जैसी सभी कठोर धाराएं लगाई जाएं। लोगों का कहना है कि सजा ऐसी होनी चाहिए कि न केवल आरोपी बल्कि उनकी आने वाली पीढ़ियां भी याद रखें कि कानून हाथ में लेने का अंजाम क्या होता है।



