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भोपाल पशु चिकित्सालय में लापरवाही का गंभीर मामला, वीडियो ने खोली व्यवस्था की पोल

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित पशु चिकित्सालय से जुड़ा एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पशु स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत उजागर कर दी है। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में अस्पताल में मौजूद चिकित्सक स्वयं यह स्वीकार करते नजर आ रहे हैं कि सोनोग्राफी मशीन लंबे समय से खराब पड़ी है और इलाज से जुड़ी कई मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब पहले से ही पशुपालक इलाज में लापरवाही के गंभीर आरोप लगाते रहे हैं।

वीडियो में क्या आया सामने

वायरल वीडियो में स्पष्ट तौर पर देखा और सुना जा सकता है कि चिकित्सक संसाधनों की कमी की बात स्वीकार कर रहे हैं। सोनोग्राफी जैसी अत्यंत आवश्यक जांच सुविधा के अभाव में गर्भवती पशुओं, गंभीर बीमारियों और आंतरिक समस्याओं का सही निदान संभव नहीं हो पा रहा है। इससे न केवल इलाज में देरी हो रही है, बल्कि कई मामलों में पशुओं की जान भी खतरे में पड़ रही है।

पहले भी लग चुके हैं आरोप

यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी भोपाल पशु चिकित्सालय को लेकर पशुपालकों ने इलाज में लापरवाही, समय पर उपचार न मिलने, दवाओं की कमी और स्टाफ की उदासीनता जैसे आरोप लगाए हैं। कई पशुपालकों का कहना है कि दूर-दराज से राजधानी के अस्पताल में उम्मीद लेकर पहुंचने के बावजूद उन्हें निराश लौटना पड़ता है।

राजधानी में हालात ऐसे तो जिलों की स्थिति क्या?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब राजधानी भोपाल के पशु चिकित्सालय की यह हालत है, तो प्रदेश के अन्य जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों के पशु अस्पतालों की स्थिति क्या होगी। पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली से पशुपालकों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक पीड़ा भी झेलनी पड़ रही है।

जिम्मेदारी किसकी?

अब सवाल सीधे तौर पर प्रशासन और पशुपालन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है।

क्या समय पर मशीनों का मेंटेनेंस नहीं कराया गया?

क्या बजट और संसाधनों की कमी का खामियाजा बेजुबान पशु भुगत रहे हैं?

क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?


जवाबदेही और सुधार की जरूरत

यह मामला केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही तय करने का है। पशु चिकित्सालयों में आधुनिक उपकरण, पर्याप्त स्टाफ और नियमित निगरानी सुनिश्चित करना अब अनिवार्य हो गया है। प्रशासन को चाहिए कि वह इस वीडियो का संज्ञान लेकर तत्काल जांच, दोषियों पर कार्रवाई और सुविधाओं के सुधार के ठोस कदम उठाए, ताकि पशुओं की जान से हो रहा यह खिलवाड़ रोका जा सके।

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