सुल्तानपुर में भ्रष्टाचार का बड़ा मामला, ज़मीन के नीचे दबी टंकी को खोदकर निकाला गया
जयसिंहपुर (सुल्तानपुर)। उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में भ्रष्टाचार का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन से लेकर शासन तक हलचल मचा दी है। पौने चार करोड़ रुपये की लागत से बनी पानी की टंकी, जो काग़ज़ों में पूरी तरह तैयार और भुगतान सहित दर्ज थी, वह ज़मीन के ऊपर कहीं दिखाई नहीं दी। मामला उछलते ही अब लखनऊ से अधिकारियों की टीम पारसपट्टी गाँव पहुँची और आखिरकार उस तथाकथित “अदृश्य टंकी” को ज़मीन के नीचे से खुदाई कर बाहर निकाला गया। यह मामला ब्लॉक मोतिगरपुर–जयसिंहपुर क्षेत्र से जुड़ा है, जहाँ जल जीवन मिशन अथवा ग्रामीण पेयजल योजना के अंतर्गत करोड़ों रुपये की परियोजना स्वीकृत की गई थी। सरकारी अभिलेखों में टंकी के निर्माण, पूर्णता प्रमाण पत्र और भुगतान की पूरी प्रक्रिया दर्शाई गई, लेकिन स्थल निरीक्षण में टंकी का नामोनिशान नहीं मिला। इसी विरोधाभास ने पूरे मामले को उजागर कर दिया।
अफसरों की मिलीभगत पर गहराता संदेह
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का साफ कहना है कि बिना अफसरों की मिलीभगत के इतनी बड़ी राशि की टंकी का “गायब” हो जाना असंभव है। सवाल उठ रहे हैं कि जब पैसा पूरी तरह खर्च दिखाया गया, तो टंकी ज़मीन के ऊपर क्यों नहीं दिखी? क्या निर्माण मानकों की अनदेखी कर जानबूझकर टंकी को दबाया गया, या फिर कागज़ों में ही निर्माण दिखाकर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया?ग्रामीणों का आरोप है कि इस पूरे घोटाले में ठेकेदार, इंजीनियर, ब्लॉक स्तर के अधिकारी और उच्च अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है। अब यह चर्चा आम हो चली है कि इस परियोजना की राशि का हिस्सा कई जिम्मेदारों की जेब में भी गया होगा।
लखनऊ तक मची अफसरों की दौड़
मामला मीडिया और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सामने आते ही सुल्तानपुर से लेकर लखनऊ तक प्रशासनिक दौड़ शुरू हो गई। जांच टीमों का गठन, फाइलों की पड़ताल और स्थलीय निरीक्षण तेज कर दिया गया है। हालांकि अब तक किसी बड़े अधिकारी पर ठोस कार्रवाई न होना भी सवालों के घेरे में है।
भ्रष्टाचार बना न्यू नॉर्मल?
यह मामला केवल एक टंकी तक सीमित नहीं है। विपक्ष और सामाजिक संगठनों का कहना है कि आज भ्रष्टाचार ‘न्यू नॉर्मल’ बनता जा रहा है। जब पौने चार करोड़ की टंकी अदृश्य हो सकती है, तो हज़ारों पुलिया, सड़क, पुल और सरकारी निर्माण काग़ज़ों में ही पूरे दिखाए जाएँ तो कोई आश्चर्य नहीं।
जनता के सवाल अब भी कायम
पैसा दिखा, टंकी क्यों नहीं? इस घोटाले का असली जिम्मेदार कौन? क्या दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी या मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा? फिलहाल ज़मीन के नीचे से टंकी निकाल ली गई है, लेकिन जनता जवाब चाहती है, केवल खुदाई नहीं। यह प्रकरण उत्तर प्रदेश में सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न बनकर खड़ा हो गया है।
पौने चार करोड़ की ‘अदृश्य टंकी’ का राज़ उजागर
