गुफा मंदिर में संत समागम: संस्कारों से जुड़ेगा समाज तभी आगे बढ़ेगी सनातन संस्कृति, बोले महामंडलेश्वर माध्वाचार्य महाराज

भोपाल । गुफा मंदिर परिसर में आयोजित संत समागम में देश के विभिन्न प्रांतों से आए संत-महात्माओं का श्रद्धा और सम्मान के साथ अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लेकर संतों का श्रीफल भेंट कर स्वागत किया और सनातन संस्कृति के संरक्षण का संकल्प लिया।

इस अवसर पर महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 माध्वाचार्य जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि परिवार और समाज को संस्कारों से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भूमिका केवल परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि वे समाज और संस्कृति की आधारशिला हैं।

“मां ही बालक की पहली गुरु”

महामंडलेश्वर माध्वाचार्य महाराज ने कहा कि एक बालक के जीवन में सबसे पहला संस्कार उसकी मां से मिलता है। इसलिए महिलाओं को धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजनों में सक्रिय सहभागिता निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ती संस्कारहीनता और सामाजिक विकृतियों को समाप्त करने के लिए मातृशक्ति को आगे आना होगा।

उन्होंने कहा कि जब परिवारों में नैतिक मूल्य और सांस्कृतिक परंपराएं मजबूत होंगी, तभी सनातन संस्कृति का विस्तार और संरक्षण संभव हो सकेगा। समाज में बढ़ती वैचारिक चुनौतियों के बीच भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है।

श्रद्धा और आध्यात्मिकता से सराबोर रहा वातावरण

कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने संतों के प्रवचनों का श्रवण कर धर्म और संस्कृति के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। पूरा वातावरण भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत दिखाई दिया।

संत समागम में राखी परमार (खाटू श्याम परिवार), क्षत्रिय अखाड़ा से आरती सिंह, महाराष्ट्रीय सभा की पूनम कुलकर्णी, पूर्णिमा चतुर्वेदी, डोली तिवारी, नीरज सिंह, पुष्पा आचार्य, छाया राठौर और गीता अग्रवाल सहित अनेक महिलाओं ने सहभागिता कर संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया।

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